दो कलमवीरों का संगम : सुमन देवी से संवाद में उभरा अभिजीत मिश्रा ‘राजन’ और उनकी युवा न्यायसेना

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दो कलमवीरों का संगम : सुमन देवी से संवाद में उभरा अभिजीत मिश्रा ‘राजन’ और उनकी युवा न्यायसेना

गोरखपुर की वैचारिक, सामाजिक और बौद्धिक भूमि पर आज एक ऐसा प्रेरक क्षण देखने को मिला, जहाँ दो सजग कलमवीरों का अद्भुत संगम हुआ। एक ओर नेशनल मानव अधिकार चेतना संगठन की प्रदेश अध्यक्ष, विश्व हिंदू महासंघ की प्रदेश पदाधिकारी तथा राष्ट्रीय पत्रकार संघ भारत की वरिष्ठ पदाधिकारी सुमन देवी, और दूसरी ओर गरीबों, पीड़ितों व वंचितों के लिए न्याय की मशाल जलाए रखने वाले युवा अधिवक्ता अभिजीत मिश्रा ‘राजन’। यह मुलाकात केवल औपचारिक भेंट नहीं थी, बल्कि विचार, अनुभव और संवेदना से भरा एक ऐसा संवाद था, जिसने न्याय, संघर्ष और सेवा के कई नए आयाम सामने रखे।

अभिजीत मिश्रा ‘राजन’ का जीवन स्वयं में एक संघर्षगाथा है। एक अत्यंत गरीब परिवार में जन्मे अभिजीत ने अभावों के बीच शिक्षा का महत्व समझा और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से जुड़कर छात्र राजनीति में सक्रिय रहते हुए अनुशासन, राष्ट्रभाव और संगठनात्मक अनुभव प्राप्त किया। एलएलबी की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने गोरखपुर बार एसोसिएशन में पंजीकरण कराया और गोरखपुर को ही अपनी कर्मभूमि चुना।

सबसे उल्लेखनीय तथ्य यह है कि अभिजीत मिश्रा कभी किसी सीनियर के जूनियर नहीं रहे। उन्होंने वकालत की शुरुआत सीधे अपने दम पर की—अपनी कुर्सी से, अपनी पहचान से। निचले पायदान से ऊपर उठते हुए उन्होंने यह सिद्ध किया कि आत्मविश्वास, परिश्रम और ईमानदारी के बल पर न्याय के क्षेत्र में भी नई राह बनाई जा सकती है।

उनकी वकालत का मूल मंत्र है—“न्याय सबके लिए”। गरीब और असहाय पीड़ितों के लिए उन्होंने कई मामलों में बिना फीस के मुकदमे लड़े, केस दायर किए और न्याय दिलाया। कई बार तो पीड़ित के पास आने-जाने के भी संसाधन न होने पर अभिजीत स्वयं उनके घर तक पहुँचे और कानूनी सहायता उपलब्ध कराई। यही कारण है कि वे आज केवल एक वकील नहीं, बल्कि जरूरतमंदों के लिए आशा का प्रतीक बन चुके हैं।

 

आज अभिजीत मिश्रा ‘राजन’ के साथ 40 से अधिक युवा वकीलों की एक सशक्त टीम कार्यरत है। यह टीम टैक्सेशन, क्रिमिनल लॉ, सिविल मामलों, पारिवारिक विवादों और विभिन्न न्यायालयीन प्रक्रियाओं में आमजन को न्याय दिलाने में अग्रणी भूमिका निभा रही है। विशेष बात यह है कि यह पूरी टीम युवा, जागरूक और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी हुई है। कई सरकारी योजनाओं के अंतर्गत अधिकारियों को प्रशिक्षण देने में भी इस समूह की भूमिका रही है, और समय-समय पर सरकार द्वारा इन्हें प्रशिक्षक के रूप में उपयोग किया गया है।

इस प्रेरक व्यक्तित्व से सुमन देवी की बातचीत ने संवाद को और भी सार्थक बना दिया।

 

प्रश्न (सुमन देवी): आप गरीब पृष्ठभूमि से आए हैं, इस अनुभव ने आपकी वकालत को कैसे प्रभावित किया?

उत्तर (अभिजीत मिश्रा): “मैंने गरीबी को बहुत करीब से देखा है। पढ़ाई कितनी मेहनत से होती है, पैसा कितनी कठिनाई से कमाया जाता है—यह सब मैंने जिया है। इसलिए जब कोई पढ़-लिखकर भी न्याय के लिए अदालत के चक्कर लगाता है और उसे त्वरित न्याय नहीं मिलता, तो उसका दर्द मैं समझ सकता हूँ।”

 

प्रश्न: बिना फीस के केस लड़ने की प्रेरणा कहाँ से मिलती है?

उत्तर: “न्याय व्यापार नहीं है। जिनके पास पैसा नहीं है, अगर उन्हें न्याय नहीं मिलेगा तो व्यवस्था पर से भरोसा उठ जाएगा। मेरी कोशिश रहती है कि कोई भी पीड़ित केवल पैसों के अभाव में न्याय से वंचित न रहे।”

 

प्रश्न: युवा वकीलों की आपकी टीम का उद्देश्य क्या है?

उत्तर: “हम सब मिलकर एक ऐसी व्यवस्था बनाना चाहते हैं जहाँ कानून आम आदमी के लिए डर नहीं, बल्कि सहारा बने। हमारी टीम का उद्देश्य सेवा, संवेदना और सशक्तिकरण है।”

इस संवाद के दौरान सुमन देवी ने अभिजीत मिश्रा ‘राजन’ और उनकी टीम की निष्ठा, साहस और सामाजिक प्रतिबद्धता की मुक्त कंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे युवा अधिवक्ता आज के समाज की वास्तविक आवश्यकता हैं, जो कानून को केवल पेशा नहीं, बल्कि सेवा मानते हैं।

कुल मिलाकर, गोरखपुर में हुआ यह संवाद न केवल दो व्यक्तित्वों की मुलाकात थी, बल्कि न्याय, पत्रकारिता और सामाजिक चेतना के साझा उद्देश्य का प्रतीक भी था। अभिजीत मिश्रा ‘राजन’ और उनकी युवा टीम जिस समर्पण से आमजन को न्याय दिलाने में जुटी है, वह आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है। वहीं, सुमन देवी जैसी सजग और निर्भीक पत्रकारों की कलम ऐसे प्रयासों को समाज के सामने लाकर उन्हें नई पहचान दिलाने का कार्य कर रही है। यही संगम एक न्यायपूर्ण, संवेदनशील और जागरूक समाज की आधारशिला रखता है।

सह संपादक सुमन जी.

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