तीन सूत्रीय मांगों को लेकर 10 जनवरी से आमरण अनशन की चेतावनी

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

तीन सूत्रीय मांगों को लेकर 10 जनवरी से आमरण अनशन की चेतावनी 

✍️ अनुपमा दुबे

गगहा।

गगहा क्षेत्र में जनसमस्याओं को लेकर भारतीय किसान यूनियन लोक शक्ति के पूर्वांचल प्रभारी दिलीप किसान ने बड़ा आंदोलनात्मक कदम उठाने की घोषणा की है। क्षेत्र में व्याप्त बिजली, सिंचाई और अतिक्रमण से जुड़ी गंभीर समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर आगामी 10 जनवरी से मां करवल माता मंदिर परिसर में आमरण अनशन पर बैठने का ऐलान किया गया है। इस संबंध में उन्होंने अपनी मांगों का लिखित प्रार्थना पत्र उच्चाधिकारियों को सौंप दिया है।

दिलीप किसान ने बताया कि करवल मझगांवा स्थित विद्युत उपकेंद्र की हालत अत्यंत दयनीय हो चुकी है। उपकेंद्र पर लगा पुराना व जर्जर 8 एमबीए ट्रांसफार्मर पूरी तरह अनुपयोगी हो चुका है, बावजूद इसके अब तक उसे बदला नहीं गया। वर्तमान में उपकेंद्र से जुड़े चारों फीडरों की आपूर्ति मात्र एक 10 एमबीए ट्रांसफार्मर के सहारे संचालित की जा रही है, जिससे उपभोक्ताओं को भीषण बिजली संकट का सामना करना पड़ रहा है। ओवरलोड की स्थिति के कारण बार-बार फॉल्ट और रोस्टर व्यवस्था लागू कर दी जाती है, जिससे ग्रामीणों को बेहद कम समय के लिए बिजली नसीब हो पा रही है।

उन्होंने आगे कहा कि 5 एमबीए का एक ट्रांसफार्मर खराब होने के बाद विभाग पुराने और जर्जर ट्रांसफार्मर के सहारे गगहा फीडर चलाने का प्रयास कर रहा है, जो बार-बार फेल हो रहा है। इससे न केवल उपभोक्ता परेशान हैं, बल्कि किसानों की कृषि गतिविधियां भी बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। दिलीप किसान ने मांग की कि तत्काल नया ट्रांसफार्मर लगाया जाए और जर्जर तारों व पोलों को बदला जाए, ताकि क्षेत्र को स्थायी समाधान मिल सके।

दूसरी प्रमुख समस्या सरयू नहर के बाऊंपार से पिछौरा के बीच हर वर्ष टूटने वाले तटबंध को लेकर है। उन्होंने कहा कि नहर टूटने से हर साल किसानों की तैयार फसलें पानी में बह जाती हैं, लेकिन इसके बावजूद संबंधित विभाग के अधिकारी चेतना-शून्य बने हुए हैं। न तो नहर की स्थायी मरम्मत कराई जा रही है और न ही प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जा रहा है। दिलीप किसान ने मांग की कि फसल नुकसान का समुचित मुआवजा दिया जाए और लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करते हुए मुकदमा दर्ज किया जाए।

तीसरी समस्या नलकूप विभाग की चक नाली से जुड़ी है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग मरम्मत कराने में पूरी तरह विफल रहा है, जिसके चलते दबंगों द्वारा चक नाली पर अवैध अतिक्रमण किया जा रहा है। बार-बार शिकायत के बावजूद विभागीय स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही, जिससे सिंचाई व्यवस्था चरमरा गई है।

दिलीप किसान ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि 10 जनवरी से पहले इन सभी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो वे किसानों और आमजन के साथ आमरण अनशन पर बैठने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं, बल्कि क्षेत्र के किसानों और उपभोक्ताओं के हक की लड़ाई है, जिसे हर हाल में अंजाम तक पहुंचाया जाएगा।

Leave a Comment

और पढ़ें