राष्ट्रीय पत्रकार संघ भारत : पत्रकारों के अधिकार, सम्मान और सुरक्षा का सशक्त प्रहरी
..

— राष्ट्रीय पर्यवेक्षक की कलम से

भारतीय लोकतंत्र की आत्मा में यदि किसी स्तंभ ने समय-समय पर व्यवस्था को आईना दिखाने, जनसमस्याओं को सत्ता के गलियारों तक पहुँचाने और समाज को जागरूक रखने का कार्य किया है, तो वह है—पत्रकारिता। इसी चौथे स्तंभ को संगठित, सुरक्षित, सम्मानित और सशक्त बनाने के संकल्प के साथ राष्ट्रीय पत्रकार संघ भारत पिछले छह से सात वर्षों से निरंतर, संयमित और प्रभावशाली ढंग से कार्यरत है। यह संस्था आज केवल एक संगठन नहीं, बल्कि पत्रकारों के लिए भरोसे, संघर्ष और समाधान का पर्याय बन चुकी है।

राष्ट्रीय पत्रकार संघ भारत का गठन ऐसे समय में हुआ, जब पत्रकार अनेक प्रकार की चुनौतियों से जूझ रहे थे—असुरक्षा, उत्पीड़न, मान-सम्मान की कमी, कानूनी उलझनें, डिजिटल युग की जटिलताएँ और सामाजिक उपेक्षा। इन परिस्थितियों में संगठन ने एक सशक्त मंच प्रदान किया, जहाँ पत्रकार न केवल अपनी समस्याएँ रख सकें, बल्कि उनका व्यावहारिक, कानूनी और नैतिक समाधान भी प्राप्त कर सकें। पिछले छह वर्षों से अधिक समय में संगठन ने पत्रकारों के जीवन में ठोस परिवर्तन लाने का कार्य किया है।

इस संगठन की सबसे बड़ी शक्ति इसका नेतृत्व और समर्पित टीम है। राष्ट्रीय अध्यक्ष जगदीश सिंह, महिला नेतृत्व के सशक्त स्वर पूनम सिंह, संगठनात्मक मजबूती के स्तंभ देवेंद्र सिंह, डॉ. देवेंद्र सिंह बघेल, अजय उपाध्याय, माननीय कुलदीप सिंह राठौड़, संतोष नयन बरनवाल, आई.बी. सिंह, विनोद सिंह सहित अनेक धुरंधर, कर्मठ और जमीनी कार्यकर्ता इस संगठन को दिशा और गति प्रदान कर रहे हैं। यह नेतृत्व केवल पदों तक सीमित नहीं, बल्कि संघर्ष के समय पत्रकारों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहने वाला नेतृत्व है।

राष्ट्रीय पत्रकार संघ भारत की कार्यशैली की विशेषता है—तत्परता के साथ संयम। संगठन न तो आवेश में निर्णय लेता है, न ही समस्याओं को टालता है। हर मुद्दे पर तथ्य, कानून और संवाद के माध्यम से समाधान खोजा जाता है। पत्रकारों पर होने वाले अत्याचार, फर्जी मुकदमे, प्रशासनिक दबाव, कार्यस्थल पर भेदभाव—इन सभी मामलों में संगठन ने समय-समय पर हस्तक्षेप कर न्यायोचित परिणाम दिलाने का प्रयास किया है। यही कारण है कि आज देश के कोने-कोने में पत्रकार इस संगठन को अपना संरक्षक मानते हैं।

डिजिटल युग में पत्रकारिता की प्रकृति बदली है। इंटरनेट, सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स ने जहाँ अवसर बढ़ाए हैं, वहीं नई समस्याएँ भी खड़ी की हैं—फेक न्यूज़ के आरोप, साइबर उत्पीड़न, आईटी कानूनों की जटिलताएँ। राष्ट्रीय पत्रकार संघ भारत ने उपलब्ध इंटरनेट जानकारी, कानूनी प्रावधानों और व्यावहारिक अनुभवों के समन्वय से पत्रकारों को मार्गदर्शन दिया है। प्रशिक्षण, जागरूकता, परामर्श और नेटवर्किंग के माध्यम से संगठन पत्रकारों को समय के अनुरूप सक्षम बना रहा है।

यह संस्था केवल संकट में साथ खड़ी होने तक सीमित नहीं है, बल्कि सम्मान, पहचान और अवसर सृजित करने का भी कार्य कर रही है। समय-समय पर सम्मान समारोह, विचार गोष्ठियाँ, संगोष्ठियाँ और सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यक्रम आयोजित कर पत्रकारों के मनोबल को ऊँचा किया गया है। संगठन का मानना है कि सशक्त पत्रकार ही सशक्त लोकतंत्र की नींव रखते हैं।

राष्ट्रीय पत्रकार संघ भारत की पहुँच आज राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक है। विभिन्न राज्यों में सक्रिय इकाइयाँ, समर्पित पदाधिकारी और जमीनी कार्यकर्ता संगठन को जीवंत बनाए हुए हैं। यह निरंतर विस्तार इस बात का प्रमाण है कि संगठन की नीतियाँ, उद्देश्य और कार्यशैली पत्रकारों के वास्तविक हितों से जुड़ी हुई हैं।

पिछले छह वर्षों में संगठन ने यह सिद्ध किया है कि यदि कोई पत्रकार किसी समस्या में फँसता है, तो वह अकेला नहीं है। संगठन उसके साथ खड़ा है—यह भरोसा ही राष्ट्रीय पत्रकार संघ भारत की सबसे बड़ी उपलब्धि है। आने वाले समय में भी संगठन पत्रकारों के अधिकारों की रक्षा, उनके सम्मान की पुनर्स्थापना और पत्रकारिता की गरिमा को अक्षुण्ण रखने के लिए निरंतर कार्य करता रहेगा।

अंततः, राष्ट्रीय पत्रकार संघ भारत केवल एक संस्था नहीं, बल्कि एक आंदोलन है—सत्य, साहस और संवैधानिक मूल्यों के संरक्षण का आंदोलन। यही इसकी पहचान है, यही इसकी ताकत है और यही इसके उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है।