सेवा, संवेदना और समर्पण का जीवंत केंद्र : रामधनी मेमोरियल अस्पताल
✍️ अनुपमा दुबे

गोरखपुर जनपद के दक्षिणांचल क्षेत्र में, पतित पावनी मां सरयू के पावन तट के समीप स्थित रामधनी मेमोरियल अस्पताल आज ग्रामीण अंचल में आधुनिक चिकित्सा सेवा का एक सशक्त और भरोसेमंद केंद्र बनकर उभरा है। यह अस्पताल न केवल इलाज का स्थान है, बल्कि सेवा, संवेदना और सामाजिक दायित्व का जीवंत उदाहरण भी है।
यह अस्पताल अपने पिता स्वर्गीय रामधनी जी की स्मृति में स्थापित किया गया है। इसके संचालक डॉ. संजय कुमार, जो पास के ही गांव नउहरतीहा/ तीहा मोहम्मदपुर के निवासी हैं, ने उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद अपने क्षेत्र की सेवा को ही जीवन का लक्ष्य बनाया। एक साधारण ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर एमबीबीएस जैसी कठिन शिक्षा प्राप्त कर अपने ही क्षेत्र में लौटकर सेवा करना, डॉ. संजय कुमार की सोच और संकल्प को दर्शाता है।

छोटे से कस्बाई क्षेत्र में स्थित होने के बावजूद रामधनी मेमोरियल अस्पताल आज चिकित्सा सुविधाओं के मामले में किसी बड़े संस्थान से कम नहीं है। यहां मेडिसिन के साथ-साथ न्यूरो (तंत्रिका रोग) की सुविधा उपलब्ध है, वहीं न्यूरो सर्जरी जैसी जटिल चिकित्सा सेवाएं भी यहां प्रदान की जा रही हैं, जो ग्रामीण क्षेत्र के लिए अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। इसके अतिरिक्त अस्पताल में प्रसव (डिलीवरी) से संबंधित सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिससे महिलाओं को सुरक्षित मातृत्व का भरोसा मिल रहा है।
इस अस्पताल की सबसे सराहनीय विशेषता इसकी सेवा भावना है। यहां आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत सप्ताह में चार से पांच दिन आयुष्मान कार्ड धारकों का निःशुल्क इलाज किया जाता है। इतना ही नहीं, कई ऐसे मरीज जो आर्थिक रूप से अत्यंत कमजोर होते हैं और इलाज या दवा का खर्च वहन करने में असमर्थ होते हैं, उन्हें भी यहां निःशुल्क चिकित्सा सेवा और दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। यह मानवीय दृष्टिकोण रामधनी मेमोरियल अस्पताल को एक अलग पहचान देता है।

डॉ. संजय कुमार का व्यक्तित्व केवल एक चिकित्सक तक सीमित नहीं है। वे सामाजिक कार्यों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। गरीबों, असहायों और जरूरतमंदों की मदद करना उनके स्वभाव का हिस्सा है। यही कारण है कि क्षेत्र में उन्हें एक व्यवस्थित, महान प्रतिभा के धनी और जमीन से जुड़े इंसान के रूप में देखा जाता है। वे उन चिकित्सकों में से हैं जो अपनी सफलता को समाज के प्रति उत्तरदायित्व मानते हैं।
अस्पताल में कार्यरत चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारी भी इसी सेवा भाव से कार्य करते हैं। मरीजों के प्रति उनका व्यवहार मृदुभाषी, सहयोगात्मक और संवेदनशील है। यहां आने वाले मरीजों को केवल इलाज ही नहीं, बल्कि सम्मान, धैर्य और अपनापन भी मिलता है, जो मानसिक रूप से उन्हें मजबूत बनाता है।
पूर्वांचल क्षेत्र में जहां आज भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए लोगों को बड़े शहरों की ओर रुख करना पड़ता है, वहीं रामधनी मेमोरियल अस्पताल को एम्स के बाद एक महत्वपूर्ण स्थानीय उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। यह अस्पताल बड़हलगंज और कश्मीर क्षेत्र के बीचो-बीच स्थित होकर 24 घंटे मरीजों की सेवा में तत्पर रहता है।

नववर्ष के अवसर पर अस्पताल परिसर में मरीजों की खुशहाली और शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना के साथ स्टाफ द्वारा सामूहिक रूप से नववर्ष मनाना इस बात का प्रतीक है कि यह संस्थान मरीजों को केवल रोगी नहीं, बल्कि अपने परिवार का हिस्सा मानता है।
निस्संदेह, रामधनी मेमोरियल अस्पताल आज मां सरयू की पावन धरती पर चिकित्सा, मानवता और सामाजिक सेवा का संगम बन चुका है। डॉ. संजय कुमार जैसे चिकित्सक यह सिद्ध करते हैं कि जब शिक्षा, संवेदना और संकल्प एक साथ मिलते हैं, तो समाज के लिए असाधारण कार्य संभव हो जाते हैं।

वरिष्ठ संवाददाता अनुपमा दुबे