गगहा थाना क्षेत्र का हाटा बाज़ार ओवरब्रिज—एक और बड़ा हादसा, और एक बार फिर जिम्मेदार कौन?
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रिपोर्ट.—सुरेश राजभर
गगहा थाना क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम सभा हाटा बाज़ार ओवरब्रिज पर आज हुआ भीषण एक्सीडेंट सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक चेतावनी है कि हमारी सड़कों का सच क्या है और जिम्मेदारों की लापरवाही किस हद तक बढ़ चुकी है। टेलर और कार के बीच हुई यह जोरदार भिड़ंत ऐसी थी कि देखने वालों के रोंगटे खड़े हो जाएं। हादसा इतना भयावह था कि वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए, हालांकि दोनों चालकों की जान बाल-बाल बच गई। आसपास मौजूद कई लोग घायल हुए, जिन्हें तुरंत स्थानीय लोगों की मदद से अस्पताल पहुंचाया गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार गोरखपुर से बाहरगंज की ओर जा रहा ट्रेलर हाटा ओवरब्रिज से उतरते समय अचानक अनियंत्रित हो गया। बताया जा रहा है कि ट्रेलर का स्टीयरिंग या कंट्रोल फेल हो गया था। यह गनीमत रही कि हादसा कम भीड़ वाले हिस्से में हुआ, वरना मौत का आंकड़ा कहीं ज्यादा भयावह हो सकता था। पर सवाल वही—ऐसा हर बार क्यों हो रहा है?
इस हादसे ने एक बार फिर सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह सड़क खुद अपनी बदहाली की गवाही देती है। आधी सड़क बनती है, आधी टूटती है, कहीं पैचिंग चल रही है, कहीं गड्ढे ही गड्ढे! हालत यह है कि 10 मीटर भी गाड़ी बिना झटके और बिना गड्ढों में उछले नहीं चल सकती। आखिर किसने दिया यह कॉन्ट्रैक्ट? कौन है जो जनता की जान से खिलवाड़ कर रहा है? और क्यों प्रशासन इस खामोशी को ढो रहा है?
सबसे बड़ा सवाल तब उठता है जब हम देखते हैं कि सड़क के किनारे लगी रेलिंग और पाइप भी मानकों के विपरीत घटिया सामग्री से बनाए गए हैं। हालात यह हैं कि जरा सा जोर पड़े और रेलिंग टूटकर नीचे गिरने की नौबत आ जाए। पानी निकासी की कोई व्यवस्था नहीं, अंडरपास कचरे से भरे पड़े हैं, सबवे अधूरे हैं, एप्रोच रोड टूटी-फूटी है। यह कैसा विकास है? किसकी जिम्मेदारी है यह सब?
क्या यही वह सड़कें हैं जिनका सपना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने देखा था? क्या सरकार की मंशा यही थी कि जनता को सुरक्षित सड़कें मिलें, सुगम यात्रा मिले? या फिर कुछ अधिकारी और ठेकेदार मिलकर मुख्यमंत्री के vision को ठेंगा दिखा रहे हैं? यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश लगती है—योगी सरकार की विकास योजनाओं को बदनाम करने की, उनके सपनों को ध्वस्त करने की।
हर दिन कोई न कोई दुर्घटना, हर दिन किसी परिवार की जिंदगी खतरे में, और हर दिन सड़कें एक नई त्रासदी का इंतज़ार करती हुई। आखिर कब तक? कब तक जनता इस निर्माण माफिया, भ्रष्ट इंजीनियरों और ढीली प्रशासनिक व्यवस्था का खामियाजा भुगतती रहेगी?
आज का यह हादसा सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि एक मांग है—जवाबदेही की, कार्रवाई की, और सख्ती की। जब तक इस ओवरब्रिज और पूरी सड़क का उच्चस्तरीय निरीक्षण कराकर दोषियों पर कठोर कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक ऐसी दुर्घटनाएं इसी तरह होती रहेंगी और innocent लोग इसकी कीमत अपनी जान से चुकाते रहेंगे।
हाटा ओवरब्रिज पर हुआ यह हादसा चेतावनी है कि अब मौन रहने का समय नहीं, अब कार्रवाई का समय है। वरना यह सड़कें ऐसे ही हमारे लोगों की ज़िंदगी निगलती रहेंगी।

