
गोरखपुर के बड़हलगंज क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस पर विशेष कार्यक्रम आयोजित
रिपोर्ट– सुरेश राजभर
गोरखपुर जनपद के बड़हलगंज क्षेत्र के ग्राम सभा मरकड़ी स्थित लक्ष्मी सर्व विकलांग सेवा संस्थान, मानसिक मंदित आश्रम गृह सह प्रशिक्षण केंद्र में अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस बड़ी ही श्रद्धा, संवेदना और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर संस्थान परिसर में विशेष कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता, संस्थान के शिक्षक–प्रशिक्षक और दिव्यांगजन तथा उनके परिजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि चिल्लूपार के लोकप्रिय विधायक माननीय राजेश त्रिपाठी जी रहे। उनके आगमन पर संस्थान के बच्चों और स्टाफ ने पुष्पगुच्छ और तालियों की गड़गड़ाहट से स्वागत किया। विधायक श्री त्रिपाठी ने संस्थान द्वारा मानसिक एवं शारीरिक रूप से विशेष बच्चों के लिए किए जा रहे सेवाकार्य की सराहना करते हुए कहा कि “दिव्यांगजन भगवान की विशेष कृपा के पात्र होते हैं। समाज की जिम्मेदारी है कि उन्हें सम्मान, अवसर और सहयोग मिले। ऐसे संस्थान मानव सेवा की अनूठी मिसाल हैं।”
कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में बड़हलगंज नगर पंचायत प्रतिनिधि उमर महेश जी ने भी शिरकत की। उन्होंने बच्चों के प्रति अपने स्नेह और संवेदना का भाव प्रकट करते हुए संस्थान के मानसिक रूप से विशेष बच्चों को ट्राईसाइकिल, साइकिल और कंबल वितरित किए। वितरण के समय बच्चों के चेहरों पर खुशी और उत्साह देखते ही बनता था। कई बच्चों ने नए साधनों के सहारे चलने–फिरने की अपनी छोटी-छोटी उपलब्धियों को मंच पर प्रदर्शित भी किया, जिसे उपस्थित जनसमूह ने गर्मजोशी से सराहा।
संस्थान के प्रबंधक एवं शिक्षकगणों ने बताया कि ऐसे आयोजन सिर्फ समारोह नहीं, बल्कि बच्चों के आत्मविश्वास बढ़ाने का माध्यम हैं। कार्यक्रम में दिव्यांगजन के अधिकारों, सरकारी योजनाओं तथा समाज में उनकी भागीदारी बढ़ाने पर भी चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि दिव्यांग जन केवल सहानुभूति नहीं, बल्कि समान अवसर और प्रोत्साहन के हकदार हैं।
अंत में संस्थान की ओर से सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम का संचालन संयोजक मंडल द्वारा किया गया।
इस तरह बड़हलगंज क्षेत्र में आयोजित यह कार्यक्रम न सिर्फ दिव्यांग दिवस की सार्थकता को उजागर करता है, बल्कि समाज को यह संदेश भी देता है कि संवेदनशीलता, सहयोग और समानता से ही दिव्यांगजन का सशक्त भविष्य संभव है।