भारत रत्न लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल जी की पुण्य तिथि पर मेरी विनम्र श्रद्धांजलि 🙏🌷

“लौह-सा संकल्प,हृदय में राष्ट्रप्रेम विराजित था,खंडित भारत को एक सूत्र में बांधने वाले महान व्यक्तिव के धनी व्यक्ति के चरणों में मेरी स्वरचित कविता भावभीनी श्रद्धांजलि के रूप में समर्पित है ✍️
लौह-सा था संकल्प तुम्हारा,
हृदय में भारत का मान समाया था।
बिखरे स्वप्नों को एक किया,
खंड-खंड राष्ट्र को सूत्र में पिरोया था।
राजपथ हो या रण की बेला,
धैर्य तुम्हारा कभी न डोला था।
निडर वाणी, अडिग था प्रण,
मातृभूमि पर सब कुछ न्योछावर बोला था।
रियासतों के टूटे तारे,
तुमने एक आकाश बनाया था।
लौह नहीं बस बाहुबल था,
दूरदर्शी मन का तेज समाया था।
न झुके तूफ़ानों के आगे,
न थके संघर्षों की धूप में तुम।
देश खड़ा है आज अभय-सा,
तुम्हारे त्याग के उजले रूप में।
पुण्यतिथि पर शीश तुम्हे नवाऊँ
कृतज्ञ हृदय से नमन करूं।
हे भारत माता के प्रहरी,
युग-युग तक तेरा वंदन करूं।
कोटिशः नमन🙏🌷🌷

सौजन्य से प्रबंध संपादक
अजय कुमार उपाध्याय