आशा व संगिनी फैसिलिटेटर को राज्य कर्मचारी का दर्जा देने की मांग तेज़

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  1. आशा व संगिनी फैसिलिटेटर को राज्य कर्मचारी का दर्जा देने की मांग तेज़
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लंबित मानदेय भुगतान शीघ्र कराने की उठी आवाज़

 

गोरखपुर। जिले में आशा एवं संगिनी फैसिलिटेटर ने एक बार फिर अपने हक और सम्मान की आवाज़ बुलंद की है। लंबे समय से मानदेय भुगतान में हो रही देरी और स्थायी व्यवस्था की मांग को लेकर कार्यकर्ताओं ने नाराजगी जताई है। उन्होंने सरकार से यह मांग की है कि आशा और संगिनी फैसिलिटेटर को राज्य कर्मचारी का दर्जा दिया जाए ताकि उन्हें नियमित वेतन, सेवा सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिल सके।

 

कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न कार्यक्रमों — जैसे टीकाकरण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, परिवार नियोजन, पोषण अभियान आदि — को गांव-गांव तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रही हैं। इसके बावजूद उन्हें न्यूनतम मानदेय पर काम करना पड़ रहा है, जो महीनों तक लंबित रहता है। कई फैसिलिटेटर ने बताया कि मानदेय के लिए उन्हें बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिससे परिवार चलाना मुश्किल हो गया है।

 

आशा व संगिनी यूनियन के स्थानीय पदाधिकारियों ने कहा कि यदि जल्द ही लंबित मानदेय का भुगतान नहीं किया गया और राज्य कर्मचारी का दर्जा देने पर ठोस निर्णय नहीं हुआ, तो आंदोलन को तेज किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि वे जिला मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन करने को बाध्य होंगी।

 

कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि जो महिलाएँ जनस्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचा रही हैं, उन्हें सम्मानजनक दर्जा मिलना चाहिए। इससे न केवल उनका मनोबल बढ़ेगा बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था भी और मजबूत होगी।

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