पेयजल संकट से जूझता गोला कस्वा का बार्ड नं. 7 — कब मिलेगी स्वच्छ पानी की राहत?” — सुरेश राजभर की कलम से

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“पेयजल संकट से जूझता गोला कस्वा का बार्ड नं. 7 — कब मिलेगी स्वच्छ पानी की राहत?”
— सुरेश राजभर की कलम से

गोरखपुर जनपद के प० गोला नगर पंचायत के वार्ड नं. 7 में बीते कई महीनों से एक गंभीर संकट विकराल रूप ले चुका है— पेयजल संकट। चौरासिया हॉस व मुस्लिम टोला बड़ी मस्जिद क्षेत्र के सैकड़ों लोग रोजाना अपनी प्यास तो बुझा लेते हैं, पर यह प्यास उन्हें बीमारियों की ओर धकेलती रहती है। कारण साफ है— लीकेज पाइपलाइन से आने वाला प्रदूषित पानी।

यह समस्या कोई नई नहीं है। लोग कभी लिखित में, कभी मौखिक रूप से अपनी पीड़ा नगर पंचायत के अधिकारियों तक पहुँचाते रहे हैं। कर्मचारी भी इस समस्या से भली-भांति परिचित हैं, परंतु वर्षों से सिर्फ आश्वासन ही मिलता रहा। कर्मचारियों का कहना है कि पुरानी पाइपलाइन गहरे दब चुकी है, जिस कारण उसका लीकेज ढूंढ पाना और ठीक कर पाना संभव नहीं हो पा रहा। नतीजा यह कि साफ पानी की जगह लोग गंदगी मिश्रित, बदबूदार, कीचड़युक्त पानी पीने को मजबूर हैं।

क्या किसी सभ्य समाज का यह भविष्य है कि लोग नाले जैसा पानी पीकर जीने को विवश हों?
क्या यह वार्ड के निवासियों की गलती है कि उन्हें आज भी स्वच्छ पानी जैसी मूलभूत सुविधा नहीं मिल रही?

पानी जीवन है, लेकिन वार्ड नं. 7 में यही पानी बीमारी बन गया है।
दस्त, उल्टी, त्वचा रोगों जैसे अनेक स्वास्थ्य खतरे इस क्षेत्र में आम हो चुके हैं। महिलाओं को भोजन पकाना हो या बच्चों को पानी पिलाना—हर घड़ी डर बना रहता है कि कहीं यह पानी घर में बीमारी की दस्तक न दे दे।

सबसे दर्दनाक बात यह है कि इस इलाके में बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा परेशान हैं। नलों से आते मैले पानी को देखने के बाद भी लोग मजबूरी में उसी पानी को छानकर या उबालकर उपयोग करने के लिए बाध्य हैं।

कब तक यह मजबूरी बने रहने वाली है? कब तक जनता अपने ही अधिकार के लिए गुहार लगाती रहेगी?

वार्ड नं. 7 के प्रार्थीगण—राखन्ड चौरसिया, सदीन चौरसिया, इन्द्रकला, बी. कुमार, शंकर, जयप्रकाश, गिरजा, मोहम्मद अली, बनी अहमद, मुहम्मद फिरदौश, वेद प्रकाश, अमजद अली, गुलाम ख्वानी, अंत्युष कुमार, जगदीश चौरसिया, रामप्रसाद, पूरन चौरसिया, और अनेक अन्य लोगों ने 25 जनवरी 2024 को नगर पंचायत को संयुक्त आवेदन देकर अपनी व्यथा रखी है।
लेकिन एक सवाल अब भी हवा में टंगा है—
क्या इस बार उन्हें समाधान मिलेगा?

इस समस्या का एक ही स्थायी समाधान है—
➡️ क्षेत्र में नई पाइपलाइन बिछाई जाए।
➡️ पुरानी, जर्जर और लीकेज पाइपलाइन को तत्काल बदलकर स्वच्छ जलापूर्ति सुनिश्चित की जाए।

यह सिर्फ एक तकनीकी मुद्दा नहीं है, यह मानव स्वास्थ्य, गरिमा और अधिकार से जुड़ा प्रश्न है।
पानी पीने का अधिकार किसी भी नागरिक का सबसे मूलभूत अधिकार है। सरकारें बदलती रही हैं, वादे बदलते रहे हैं, पर वार्ड नं. 7 के लोगों की किस्मत नहीं बदली।

आज यह सिर्फ एक शिकायत नहीं,
यह एक आक्रोश है, एक दर्द है, एक पुकार है।

नगर पंचायत प्रशासन से निवेदन नहीं, बल्कि उम्मीद है कि इस गंभीर परिस्थिति को समझते हुए तुरंत कार्यवाही की जाए। क्योंकि यदि आज नहीं—तो कब?

“स्वच्छ पानी की मांग कोई विलासिता नहीं—यह जीवन का आधार है।”

सुरेश राजभर

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