
सुरेश राजभर की कलम से – प्रशासनिक सुस्ती और बढ़ता आपराधिक दुस्साहस

गोरखपुर जनपद के गगहा थाना क्षेत्र में बीती रात घटी घटना ने एक बार फिर पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी और सामाजिक सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खजुरी बाबू गांव की रहने वाली ज्योति देवी पत्नी राम नगीना द्वारा दी गई तहरीर न केवल एक गंभीर आपराधिक प्रकरण है, बल्कि यह बताती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में कानून का डर किस तरह लगातार खत्म होता जा रहा है।
पीड़िता के अनुसार, पड़ोसी सतीश रोजाना उनके घर के नहानी वाले हिस्से में छत पर चढ़कर झांकता था। महिला सुरक्षा से खिलवाड़ का यह कृत्य जब ज्योति देवी और उनके परिवार ने रोका तो मामला और उग्र हो गया। बताया जा रहा है कि बीती रात करीब सात बजे सतीश, निगम, मनभवता, प्रदीप, संदीप, संगीता और अन्य सहयोगियों ने न केवल पीड़ित परिवार की बाउंड्री दीवार गिराई, बल्कि घर में घुसकर लाठी-डंडों से निर्मम पिटाई भी की। महिला और उसके पति रामनगीना को गंभीर चोटें आईं। महिला सुरक्षा, घरेलू सम्मान और व्यक्तिगत गोपनीयता की खुलेआम धज्जियां उड़ाने की यह घटना किसी भी सभ्य समाज के लिए कलंक है।
पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया है कि इन लोगों ने पहले भी मारने-पीटने की घटनाएं की हैं, जिसकी शिकायतों पर संतोषजनक कार्रवाई न होने से ही इन आरोपियों के हौसले इतने बुलंद हुए हैं। यह स्थिति यह दर्शाती है कि स्थानीय स्तर पर पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली कहीं न कहीं ढीली पड़ चुकी है। जब अपराधी बार-बार हमला करें, महिलाओं की इज्जत पर चोट करें, घर में घुसें, दीवार गिराएं और फिर भी बिना डर के घूमते रहें — तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या प्रशासन का भय समाप्त होता जा रहा है?
थाना प्रभारी अंजुल चतुर्वेदी का कहना है कि “तहरीर पड़ी है, कार्रवाई की जा रही है।” लेकिन ज़मीन पर सवाल यह है कि कार्रवाई समय रहते क्यों नहीं होती? बार-बार मारपीट का शिकार होने वाला परिवार आखिर कब तक सुरक्षा का इंतजार करेगा?
गांवों में बढ़ते ऐसे मामलों से साफ है कि जब तक स्थानीय स्तर पर पुलिस तत्काल और कठोर कार्रवाई नहीं करेगी, तब तक अपराधियों का दुस्साहस बढ़ता ही रहेगा। समाज में महिलाओं के सम्मान और ग्रामीण शांति व्यवस्था का सीधा संबंध प्रशासन की सक्रियता से होता है। यदि पीड़ित को हर बार खून से लथपथ होकर थाने की चौखट पर खड़ा होना पड़े, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था पर बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न है।
समय की मांग है कि इस मामले में कड़ी कार्रवाई, गिरफ्तारी और परिवारी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। साथ ही, ऐसे प्रकरणों में पुलिस को संवेदनशीलता और तत्परता के साथ काम करना होगा। नहीं तो मनबढ़ तत्वों का हौसला इसी तरह बढ़ता रहेगा और प्रशासन का डर समाप्त हो जाएगा, जिसका असर पूरे समाज पर पड़ेगा।
गगहा की यह घटना सिर्फ एक परिवार की पीड़ा नहीं, बल्कि प्रशासनिक सुस्ती और बढ़ते अपराधी मनोबल का आईना है। अब ज़िम्मेदारी पुलिस-प्रशासन की है कि वह इस आईने में दिखती सच्चाई को समझे और अपराधियों के खिलाफ त्वरित तथा कठोर कार्रवाई कर सामाजिक व्यवस्था को फिर से मजबूत करे।
— सुरेश राजभर