कवयित्री सोनी शुक्ला “क्रांति”
राष्ट्रीय अध्यक्ष – जनहित सर्व समाज सेवा समिति, संपूर्ण भारत
भाइयों और बहनों,
साथियो, आज मैं इस मंच से वह सच कहने आई हूँ जिसे बरसों से दबाया जा रहा है। हम सबको बरसों-बरस आरक्षण के नाम पर उलझाया गया, बहकाया गया और समाज को बांटने की कोशिश की गई। और जब भी हमने सवाल उठाया—हमारी ब्राह्मण बेटियों के मान-सम्मान की बात की—तब हमें ही कटघरे में खड़ा किया गया।
मैं आज यह साफ-साफ कह रही हूँ—किसी भी बेटी का अपमान अब बर्दाश्त नहीं होगा! न आरक्षण के नाम पर, न राजनीति के नाम पर।
हमारे देश में बड़े-बड़े नेताओं ने अंतरजातीय विवाह कर समाज को यह संदेश दिया कि इंसान की पहचान उसकी जाति नहीं, उसके कर्म हैं।
डॉ. भीमराव अंबेडकर ने स्वयं एक ब्राह्मण कन्या, डॉ. सविता अंबेडकर से विवाह किया।
स्व. रामविलास पासवान ने ब्राह्मण परिवार की रीना शर्मा से विवाह किया।
ऐसे अनेकों विवाह समाज में समानता और एकता के प्रतीक हैं।
लेकिन सवाल यह है कि जब उदाहरण खुद नेताओं ने पेश किए, तो फिर समाज को क्यों बांटा गया?
क्यों हमारी बेटियों के सम्मान को निशाना बनाया गया?
क्यों आरक्षण को एक हथियार बनाकर लोगों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा किया गया?
साथियो,
आज मैं यह साफ घोषणा करती हूँ—बेटियाँ किसी की भी हों, उनका सम्मान सर्वोपरि है!
हम किसी भी कीमत पर नारी अपमान स्वीकार नहीं करेंगे।
जो लोग आरक्षण के नाम पर महिलाओं को बदनाम, अपमानित या भयभीत करते हैं—उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि नारी अब जाग चुकी है।
हम संघर्ष चाहते हैं, टकराव नहीं।
हम समाधान चाहते हैं, बंटवारा नहीं।
हम सामाजिक न्याय की बात करते हैं, राजनीतिक खेल की नहीं।
लेकिन…
अगर हमारी बहनों का सम्मान खतरे में डाला जाएगा,
अगर नारी शक्ति की गरिमा पर चोट की जाएगी,
अगर समाज को भ्रम में रखा जाएगा—
तो यह मंच, यह जनता, यह नारी शक्ति चुप नहीं बैठेगी!
हम संविधान के दायरे में रहते हुए
जन आंदोलन करेंगे,
सत्याग्रह करेंगे,
लोकतांत्रिक लड़ाई लड़ेंगे—
और इस देश की हर बेटी का सम्मान सुरक्षित करके रहेंगे।
मैं सरकार से आग्रह करती हूँ—
नारी सुरक्षा पर कठोर कानून बने।
महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियों पर सख्त कार्रवाई हो।
सामाजिक न्याय पर खुली चर्चा हो, संवाद हो, समाधान हो—
लेकिन नारी की गरिमा के साथ खिलवाड़ किसी कीमत पर न हो!
आज यह मंच कह रहा है—
अब नारी शक्ति जाग चुकी है।
अब किसी प्रकार का अपमान स्वीकार नहीं।
अब अन्याय के विरुद्ध आवाजें उठेंगी—एकजुट होकर, संगठित होकर और साहस के साथ।
मैं सोनी शुक्ला “क्रांति”,
इस देश की हर बेटी की ओर से यह संकल्प लेती हूँ कि—
हम सम्मान, न्याय और समानता की इस लड़ाई को
अंतिम सांस तक जारी रखेंगे।
जय नारी शक्ति!
जय समाज, जय देश!