- जनहित सर्व समाज सेवा समिति : समाज में परिवर्तन की अलख जगाने वाला संघर्ष, सेवा और समर्पण का सशक्त संगठन
वरिष्ठ समाजसेवी डॉक्टर देवेंद्र सिंह बघेल की कलम से
जब समाज विषमताओं, अन्याय, गरीबी, असमानता और सामाजिक उपेक्षाओं से जूझता है, तब ऐसी घड़ी में कुछ लोग केवल तमाशबीन बनकर खड़े रहते हैं—लेकिन दूसरी ओर कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो अपनी आत्मा की पुकार सुनते हैं, दूसरों की पीड़ा को अपनी पीड़ा मानते हैं और सेवा को जीवन का सर्वोच्च धर्म समझते हैं। जनहित सर्व समाज सेवा समिति (संपूर्ण भारत) ऐसी ही जनसमर्पित संस्था है, जो “सेवा, समर्पण और सहयोग” को अपना मार्गदर्शक बनाकर समाज को नई दिशा देने के लिए निरंतर संघर्षरत है।
लखनऊ स्थित मायापुरम कॉलोनी, आलमनगर में स्थापित इस समिति का नेतृत्व राष्ट्रीय अध्यक्ष कवियत्री सोनी शुक्ला ‘क्रांति’ के हाथों में है—एक ऐसा नाम जो संवेदना, संघर्ष और सामाजिक परिवर्तन की प्रचंड इच्छा का प्रतीक है। उनके साथ सचिव कृष्ण कांत (संतोष दुबे), कोषाध्यक्ष लक्ष्मी कांत शुक्ला, उपाध्यक्ष केशव कांति, सदस्य अभिषेक तिवारी, अवधेश अवस्थी, नेहा अवस्थी प्रदेश अध्यक्ष गुडिया तिवारी , प्रदेश उपाध्यक्ष रजनी तिवारी प्रदेश अध्यक्ष अनिल त्रिवेदी , प्रदेश उपाध्यक्ष हरेंद्र सिंह प्रदेश महासचिव विजय प्रकाश मिश्रा राष्ट्रीय संयोजक डॉ प्रमोद पल्लवी जी साहित्य प्रकोष्ठ प्रदेश अध्यक्ष डॉ हरि प्रकाश हरी , राष्ट्रीय प्रवक्ता शिव मूर्ति जी महाराज प्रदेश प्रवक्ता सुभाष मिश्रा राजेश कुमार मिश्रा जिला अध्यक्ष बरेली प्रदेश संगठन मंत्री शशांक शेखर मिश्रा जी प्रदेश सदस्य आदित्यभान मिश्रा अन्य जैसे कर्मठ पदाधिकारी एवं सदस्यगण समाज हित के लिए तन-मन से जुड़े हुए हैं।
समिति के कार्यों की उपयोगिता और व्यापकता केवल कागज़ों तक सीमित नहीं—बल्कि गाँवों, शहरों, बस्तियों और समाज के हर वर्ग में दिखाई देती है। चाहे गरीब और बेसहारा परिवारों की सहायता हो, महिलाओं के उत्थान की पहल हो, युवा शक्ति को मार्गदर्शन देना हो, या फिर देशभर में धार्मिक-सामाजिक जागरूकता फैलानी हो—समिति हर मोर्चे पर दृढ़ संकल्प के साथ सक्रिय है।
द्वंद्वात्मक संघर्ष : समस्याएँ बनाम समाधान
आज समाज कई विरोधाभासों में उलझा हुआ है—
एक ओर आधुनिकता की चमक, दूसरी ओर संवेदनाओं का क्षरण,
एक ओर तकनीक की तरक्की, दूसरी ओर मानवीय मूल्यों का पतन,
एक ओर विकास की दौड़, दूसरी ओर गरीबों की उपेक्षा।
यही द्वंद्व जनहित सर्व समाज सेवा समिति को प्रेरित करता है कि वह उन टूटते हुए पुलों को जोड़े, जो समाज को विभाजित करते हैं। संस्था का मानना है कि “परिवर्तन किसी सरकार का नहीं, समाज का सामूहिक संकल्प है”, और यह संकल्प तभी साकार होगा जब हर व्यक्ति स्वयं को जिम्मेदार माने।
नेतृत्व का प्रभाव : जोश और संवेदना का संगम
राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनी शुक्ला ‘क्रांति’ न केवल संगठन चलाती हैं, बल्कि हर कार्यक्रम में प्रत्यक्ष रूप से शामिल होकर उसे ऊर्जा देती हैं। उनका उद्देश्य साफ़ है—
“समाज के हर वर्ग को जोड़ना, उनकी पीड़ा को सुनना और समाधान की दिशा में निरंतर प्रयत्न करना।”
उनके नेतृत्व में समिति ने देशभर में सद्भावना रैलियाँ, सेवा शिविर, रक्तदान अभियान, महिला सशक्तिकरण कार्यशालाएँ, शिक्षा सहायता कार्यक्रम और धार्मिक-सामाजिक जागरूकता अभियान सफलतापूर्वक चलाए हैं।
संगठन की उपयोगिता : क्यों है यह जरूरी?
आज जब समाज में राजनीतिक विभाजन बढ़ रहे हैं, धार्मिक भावनाओं के नाम पर अनावश्यक संघर्ष बढ़ाए जा रहे हैं, और युवा वर्ग मार्गदर्शन के अभाव में भ्रमित हो रहा है—ऐसे में जनहित सर्व समाज सेवा समिति आशा की एक किरण बनकर उभरती है।
इसकी उपयोगिता केवल सहायता तक सीमित नहीं, बल्कि—
यह समाज के कमजोर वर्गों को आवाज देती है
युवाओं को सकारात्मक दिशा देती है
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करती है
बुजुर्गों और जरूरतमंदों के लिए सेवा के अभियान चलाती है
धार्मिक-सांस्कृतिक मूल्यों को जोड़कर समाज में सद्भाव बढ़ाती है
निष्कर्ष : सेवा ही जीवन का सर्वोच्च धर्म
समिति का संदेश स्पष्ट है—
“संगठन तभी मजबूत होता है, जब लोग खुद को समाज के उत्थान के लिए समर्पित कर दें।”
आज जनहित सर्व समाज सेवा समिति एक आंदोलन बन चुकी है। इसकी शक्ति पदाधिकारियों के पद में नहीं, बल्कि उनके दिलों में बसती है। उनकी सेवा भावना ही समाज को जोड़ती है, प्रेरित करती है और परिवर्तन की दिशा में अग्रसर करती है।
समिति का यह संघर्ष, यह द्वंद्व, यह जोश—न केवल सराहनीय है, बल्कि समाज के लिए आवश्यक भी।
क्योंकि जब समाज उठता है, तो देश उठता है।
और जब इंसान मानवता के लिए खड़ा होता है, तभी सभ्यता जीवित रहती है।
जनहित सर्व समाज सेवा समिति—समाज सेवा का उज्ज्वल भविष्य, परिवर्तन की अटूट आशा।