ग्राम सभा खडेसरी में मानव शिक्षा सेवा संस्थान का 11वाँ सामूहिक विवाह समारोह — सामाजिक सरोकार और राजनीतिक संदेशों का एक तीखा विश्लेषण रिपोर्ट – सुरेश राजभर

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ग्राम सभा खडेसरी में मानव शिक्षा सेवा संस्थान का 11वाँ सामूहिक विवाह समारोह — सामाजिक सरोकार और राजनीतिक संदेशों का एक तीखा विश्लेषण

रिपोर्ट – सुरेश राजभर

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गोरखपुर जनपद के बड़हलगंज क्षेत्र स्थित ग्राम सभा खडेसरी इस सप्ताह सामाजिक जागरूकता, लोकहित और संगठनात्मक प्रतिबद्धता का अनोखा केंद्र बन गया। मानव शिक्षा सेवा संस्थान के प्रबंधक आलोक गुप्ता द्वारा आयोजित 63 जोड़ों के ग्यारहवें सामूहिक विवाह समारोह ने न केवल सामाजिक एकता का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत किया, बल्कि यह भी साबित किया कि यदि नीयत साफ हो और उद्देश्य जनसेवा का हो, तो संसाधनों की कमी भी आगे झुक जाती है।

 

लेकिन इस भव्य आयोजन का एक दूसरा आयाम भी है—सामाजिक कार्यों में बढ़ती राजनीतिक सक्रियता और उसके प्रभावों का तीखा मूल्यांकन। समारोह के मुख्य अतिथि, उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर, तथा विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय प्रमुख महासचिव अरविंद राजभर की उपस्थिति ने कार्यक्रम को राजनीतिक चमक तो दी, पर साथ ही यह प्रश्न भी खड़ा किया कि क्या वास्तव में ऐसे आयोजनों का केंद्र बिंदु समाज के गरीब परिवार हैं, या फिर इन्हें राजनीति की जमीन मजबूत करने के लिए एक मंच भर बना दिया जाता है?

 

आलोक गुप्ता का यह प्रयास निश्चित रूप से प्रशंसनीय है। 63 गरीब, असहाय और आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों की बेटियों को सम्मानजनक विवाह का अवसर उपलब्ध कराना कोई साधारण बात नहीं। समाज में व्याप्त दहेज प्रथा, शोषण और आर्थिक विषमता के बीच ऐसे आयोजन आशा की किरण बनकर उभरते हैं। लेकिन इस सकारात्मक पहल के बीच नेताओं की बढ़ती मौजूदगी और उनका मंच पर दिया जाने वाला ‘संदेश’ कहीं न कहीं एक प्रश्नचिह्न भी छोड़ जाता है—क्या ये नेता साल भर इन गरीब परिवारों की सुध लेते हैं, या फिर ऐसे आयोजनों के अवसर पर ही “समाज सेवा” का उनका चेहरा चमकने लगता है?

 

समारोह में नेताओं के भाषणों में विकास, पिछड़ों की उन्नति, जनसरोकार और सामाजिक न्याय की बातें खूब सुनाई दीं। लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि बड़ी-बड़ी घोषणाओं और भाषणों के बावजूद समाज के निचले स्तर का संघर्ष जस का तस बना हुआ है। यही वह बिंदु है जहाँ समीक्षात्मक दृष्टि आवश्यक हो जाती है। समाजसेवा का असली उद्देश्य राजनीतिक लाभ या भीड़ जुटाने का माध्यम नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना और अपनेपन का विस्तार होना चाहिए — जिसकी मिसाल इस आयोजन में गुप्ता परिवार ने प्रस्तुत की, लेकिन क्या हमारे जनप्रतिनिधि इसे समझते हैं?

 

यह भी उल्लेखनीय है कि सामूहिक विवाह जैसे आयोजनों में पारदर्शिता और संगठनात्मक मजबूती का विशेष महत्व होता है। मानव शिक्षा सेवा संस्थान ने इस दिशा में सराहनीय प्रबंधन प्रस्तुत किया—व्यवस्था, सुरक्षा, भोजन, सामग्री वितरण और सभी विधि-विधान का सुचारु संचालन इसका प्रमाण है। यह संस्था वर्षों से बिना भेदभाव के समाज के जरूरतमंद परिवारों को सहयोग करती आ रही है।

 

समारोह में भाग लेने वाले 63 जोड़ों के चेहरे पर जो संतोष और आत्मविश्वास दिखा, वह इस बात का संकेत है कि यदि समाज और संस्थाएं मिलकर काम करें, तो गरीबी की बेड़ियों को तोड़ा जा सकता है। लेकिन यह भी उतना ही सत्य है कि जब तक राजनीतिक नेतृत्व केवल मंचों पर दिखाई देता रहेगा और ज़मीनी मदद को लेकर उदासीन रहेगा, तब तक ऐसे आयोजनों की आत्मा अधूरी ही रहेगी।

 

निष्कर्षतः, खडेसरी का सामूहिक विवाह समारोह सामाजिक चेतना का एक उज्ज्वल उदाहरण है। लेकिन इस आयोजन में नेताओं की मौजूदगी, उनके भाषणों और उनके वास्तविक योगदान के बीच जो दूरी दिखती है, वह समाज को सोचने पर मजबूर करती है। समाजसेवा का यह मंच वास्तव में गरीबों की खुशियों के लिए है, न कि राजनीतिक तस्वीर चमकाने के लिए — इसे समझना समय की मांग है।

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