इलाज में घोर लापरवाही या मौत का सौदा? रामधनी हॉस्पिटल में 15 वर्षीय अंबिका की संदिग्ध मृत्यु से मचा बवाल

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इलाज में घोर लापरवाही या मौत का सौदा?

रामधनी हॉस्पिटल में 15 वर्षीय अंबिका की संदिग्ध मृत्यु से मचा बवाल

सुरेश राजभर की विशेष रिपोर्ट

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गोरखपुर जनपद के बड़हलगंज क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की सच्चाई एक बार फिर मुंह चिढ़ाती नजर आई, जब पटना चौराहे स्थित कथित “मल्टीस्पेशियलिटी” रामधनी हॉस्पिटल में इलाज के दौरान 15 वर्षीय नाबालिग अंबिका की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। परिजनों द्वारा लगाए गए आरोप अस्पताल की कार्यशैली ही नहीं, बल्कि इस बात की ओर भी इशारा करते हैं कि क्या यहां इलाज होता है या फिर लापरवाही से मौतें लिखी जाती हैं?

बेलसड़ी गांव की रहने वाली मृतका की मां किरन देवी ने फफकते हुए बताया कि उन्होंने अपनी बेटी को भरोसे के साथ अस्पताल में भर्ती कराया था, लेकिन “इलाज” के नाम पर जो हुआ, वह किसी भी मां के दिल को चीर देने वाला है। परिजनों के अनुसार बेटी की हालत लगातार बिगड़ती रही, पर अस्पताल प्रशासन बेपरवाह बना रहा। न विशेषज्ञ डॉक्टर बुलाए गए, न सही समय पर रेफर किया गया—जैसे किसी की जान नहीं, एक कागजी औपचारिकता चल रही हो।

सबसे गंभीर आरोप यह लगा है कि बच्ची का इलाज एक जूनियर डॉक्टर के भरोसे छोड़ दिया गया। परिजनों का कहना है कि डॉक्टर और स्टाफ बार-बार टालमटोल करते रहे और जब तक हालात हाथ से निकल न गए, किसी ने बच्ची की गंभीर स्थिति को समझने की कोशिश ही नहीं की।

मृतका की मां ने तो यहां तक कहा—

“आयुष्मान योजना के पैसे के चक्कर में मेरी बच्ची की जान ले ली गई। बस कार्ड पर पैसा चढ़ाने की जल्दी थी, इलाज करने में किसी को दिलचस्पी नहीं थी।”

ऐसा आरोप कोई मामूली शब्द नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था के चेहरे से नकाब उतारने वाला बयान है।

घटना के बाद परिजनों ने थाने में तहरीर दी, जिस पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से क्या खुलासा होगा, यह तो आगे पता चलेगा, लेकिन जिस तरह स्थानीय लोग इस मौत को हत्या के समान मानकर आक्रोश जता रहे हैं, उससे साफ है कि इलाके में पहले से ही इस अस्पताल की कार्यशैली पर सवाल उठते रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार यहां गलत इलाज, मनमानी वसूली और अनुभवहीन स्टाफ के सहारे इलाज चलने की शिकायतें सामने आई हैं। लेकिन प्रशासन की चुप्पी ने अस्पताल प्रबंधन के हौसले बढ़ा दिए हैं।

अंबिका की मौत ने पूरे क्षेत्र में हलचल मचा दी है। ग्रामीणों की मांग है कि इस अस्पताल की पूरी तरह निष्पक्ष जांच कराई जाए, अस्पताल के लाइसेंस से लेकर डॉक्टरों की योग्यता तक सबकी जांच हो, और दोषियों पर ऐसी कड़ी कार्रवाई हो कि भविष्य में कोई भी अस्पताल गरीबों की जिंदगी से खिलवाड़ करने की हिम्मत न कर सके।

कहने को यह एक बच्ची की मौत है,

पर इसमें छिपा सच अगर सामने आया,

तो शायद यह सिर्फ एक अस्पताल का मामला नहीं रहेगा—

यह पूरे स्वास्थ्य तंत्र की पोल खोल देगा।

यह मामला सिर्फ एक परिवार का नहीं,

यह हर उस आम आदमी की लड़ाई है

जो अस्पताल के दरवाजे पर जिंदगी की उम्मीद लेकर जाता है

और बदले में लापरवाही का शिकार होकर लौट आता है।

—सुरेश राजभर

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