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गरीब की पुकार दबंगों के शोर में खोई – छपिया गांव में जमीन कब्जे का गंभीर मामला, पुलिस प्रशासन पर प्रश्नचिन्ह
(सुरेश राजभर की विशेष रिपोर्ट)
गोरखपुर जनपद के बड़हलगंज क्षेत्र अंतर्गत ग्राम छपिया में रहने वाले पीड़ित सत्येंद्र तिवारी न्याय की लड़ाई लड़ते-लड़ते पूरी तरह थक चुके हैं। उनका आरोप है कि गांव के ही विवेक तिवारी और विनोद तिवारी ने स्थानीय दरोगा एवं ग्राम प्रधान की मिलीभगत से उनकी जमीन पर जबरन कब्जा कर लिया। पीड़ित का कहना है कि उनका भूमि खाता संख्या 0.045 हेक्टेयर है, जिस पर विपक्षी पक्ष द्वारा रातों-रात पक्की दीवार खड़ी कर दी गई।
पीड़ित सत्येंद्र तिवारी बताते हैं कि उन्होंने कब्जा रोकने के लिए 28 नवंबर 2025 को सिविल जज (जूनियर डिवीजन) से स्थगन आदेश (Stay Order) प्राप्त किया और तत्काल बड़हलगंज थाना पहुंचकर आदेश प्रस्तुत करना चाहा। परंतु, यह पीड़ित के अनुसार, थाने के पुलिस अधिकारियों ने उनका स्थगन आदेश लेने से ही इनकार कर दिया।
पीड़ित का कहना है कि उन्होंने थाने में बार–बार गुहार लगाई, चक्कर लगाए, पर हर बार निराशा ही हाथ लगी। हार मानकर उन्होंने 112 आपातकालीन सेवा तथा 1076 पुलिस हेल्पलाइन पर भी कई बार कॉल किया, परन्तु कहीं से भी सहायता नहीं मिली।
इसी बीच, 29 नवंबर 2025 की रात लगभग 10 बजे विपक्षी पक्ष ने पुलिस प्रशासन की मौजूदगी और सहयोग से विवादित भूमि पर पक्की दीवार खड़ी कर दी, जो कि न्यायालय के आदेशों की सीधी अवमानना मानी जा रही है।
क्या गरीब की आवाज यूँ ही दबती रहेगी?
घटना से पूरे क्षेत्र में आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि न्यायालय का आदेश होने के बावजूद पुलिस सहयोग न करे, तो आम नागरिक कहाँ जाए? पीड़ित पूछता है
“क्या गरीब की कोई सुनवाई नहीं? क्या पुलिस प्रशासन केवल दबंगों की मदद के लिए है? न्यायालय के आदेशों का पालन कौन कराएगा?”
पीड़ित के अनुसार, थाने द्वारा सहयोग से इनकार करना, फोन पर सहायता न मिलना, और अदालत के आदेश की अनदेखी करना — यह सब गंभीर सवाल खड़े करता है कि आखिर गरीब इंसान किस पर भरोसा करे।
न्यायालय की अवमानना का गंभीर मामला
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, जिस प्रकार से न्यायालय द्वारा दिए गए Order of Status Quo या Stay Order को थाने ने न केवल नजरअंदाज किया, बल्कि कब्जा करने वालों को मौका भी दिया — यह Contempt of Court के दायरे में आता है।
यह मामला उच्चाधिकारियों के संज्ञान में जाने योग्य है, क्योंकि:
न्यायालय का आदेश स्वीकार न करना
आदेश का पालन न कराना
आदेश की अवहेलना होने देना
कब्जाधारकों को संरक्षण देना
ये सभी गंभीर प्रशासनिक लापरवाही एवं भ्रष्ट आचरण की ओर इशारा करते हैं।
प्रशासन से पीड़ित की विनती – न्याय मिले, अवैध निर्माण हटे
सत्येंद्र तिवारी ने जिलाधिकारी गोरखपुर, एसडीएम गोला, एसएसपी गोरखपुर, तथा माननीय मुख्यमंत्री जी से निवेदन किया है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
पीड़ित की मांग है कि—
1. विवादित भूमि पर हुए अवैध निर्माण को तत्काल ध्वस्त कराया जाए।
2. न्यायालय के आदेशों की अवमानना पर दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हो।
3. जमीन पर शांतिपूर्वक कब्जा बहाल कराया जाए।
4. दबंगई और मिलीभगत में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
निष्कर्ष — यह सिर्फ एक व्यक्ति की लड़ाई नहीं, सिस्टम की परीक्षा भी है
यह मामला केवल एक जमीन विवाद का नहीं, बल्कि न्यायपालिका, पुलिस और प्रशासन के बीच तालमेल की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल है।
अगर न्यायालय के आदेश की अनदेखी करके कोई भी अवैध निर्माण कर सकता है, तो कानून का राज कहाँ बचता है?
ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि गरीब की आवाज दबाई नहीं जानी चाहिए। पीड़ित सत्येंद्र तिवारी को न्याय मिले — यह सिर्फ उनकी लड़ाई नहीं, बल्कि पूरे समाज की न्याय व्यवस्था में आस्था का सवाल बन चुका है।