वरिष्ठ समाजसेवी सुमन देवी : संघर्ष, समर्पण और सामाजिक नेतृत्व की अद्वितीय मिसाल

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वरिष्ठ समाजसेवी सुमन देवी : संघर्ष, समर्पण और सामाजिक नेतृत्व की अद्वितीय मिसाल

 

सामाजिक परिवर्तन का इतिहास हमेशा उन व्यक्तियों के नाम से उज्ज्वल होता है, जिन्होंने अपनी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं से ऊपर उठकर समाज के हित को प्राथमिकता दी। वरिष्ठ समाजसेवी सुमन देवी ऐसी ही विलक्षण शख्सियत हैं, जिनका पूरा जीवन सेवा, संघर्ष, नारी उत्थान और सामाजिक न्याय के लिए समर्पित रहा है। देवरिया जिले के एक छोटे से गाँव में जन्मी सुमन देवी ने साधारण परिस्थितियों से उठकर समाजसेवा के क्षेत्र में एक ऐसी पहचान बनाई है, जिसे आज पूरे प्रदेश में सम्मान और आदर के साथ देखा जाता है।

गाँव की धरती से सेवा की राह

देवरिया की माटी में पली-बढ़ी सुमन देवी के बचपन में ही समाज के लिए कुछ करने का बीज अंकुरित हो गया था। ग्रामीण परिवेश में पली-बढ़ी इस संवेदनशील बेटी ने गरीबी, संघर्ष, असमानता और महिलाओं की समस्याओं को करीब से देखा। यही अनुभव आगे चलकर उनके जीवन का आधार बने। विवाह के बाद वे गाज़पुर जिला गोरखपुर की बहू बनकर आईं, पर सेवा का भाव और समाज के प्रति समर्पण निरंतर बढ़ता गया।

सामाजिक संगठनों में सक्रिय नेतृत्व

आज सुमन देवी कई सामाजिक, सांस्कृतिक और मानवाधिकार संस्थाओं में उच्च पदों पर आसीन हैं।

विश्व हिंदू महासंघ (प्रदेश) में वे प्रदेश उपाध्यक्ष (मीडिया प्रकोष्ठ) के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

नेशनल मार्गदर्शक चेतना संगठन में मानवाधिकार से जुड़े मामलों पर लगातार कार्यरत हैं।

प्रदेश अध्यक्ष – महिला प्रकोष्ठ के रूप में वे महिला अधिकारों, सुरक्षा और सम्मान के लिए अपनी सशक्त आवाज उठाती रहती हैं।

इसके साथ ही वे एंटी करप्शन एवं भ्रष्टाचार निरोधक संस्थाओं में भी महत्वपूर्ण पदों पर रहकर समाज को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने हेतु सक्रिय हैं।

उनका नेतृत्व शैली सीधी, पारदर्शी और जन-केंद्रित है। पूरे प्रदेश में उनकी अलग पहचान है और यह कहना गलत नहीं होगा कि सामाजिक जगत में उनकी “अलग तूती बोलती है”।

पत्रकारिता जगत में मजबूत पकड़

सुमन देवी केवल समाजसेवी ही नहीं, बल्कि एक सशक्त पत्रकार भी हैं।

वे भारत समाचार दर्शन 24 की सह संपादक के रूप में कार्यरत हैं।

कई अन्य चैनलों में भी वे नियमित रूप से मीडिया कवरेज करती हैं।

सामाजिक मुद्दों को उठाने में उनकी पकड़ गहरी है।

उनकी खोजी पत्रकारिता उन्हें बाकी पत्रकारों से अलग पहचान प्रदान करती है।

वे मानती हैं कि पत्रकारिता समाज का दर्पण है और सत्य को निर्भीकता से प्रस्तुत करना ही पत्रकार की वास्तविक पहचान है।

महिला उत्थान की सच्ची प्रहरी

सुमन देवी का सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्षेत्र महिला उत्थान है।

वे लगातार ऐसे कार्यक्रमों, जागरूकता अभियानों और सेमिनारों में शामिल रहती हैं, जिनका उद्देश्य महिलाओं को शिक्षित, सक्षम और स्वावलंबी बनाना है।

घरेलू हिंसा, दहेज, उत्पीड़न, महिला सुरक्षा, शिक्षा—इन सभी मुद्दों पर वे खुलकर आवाज उठाती हैं।

वे कहती हैं,

“महिलाओं को केवल सुरक्षा नहीं, अवसर भी चाहिए—और यह अवसर समाज, शासन और परिवार, तीनों को मिलकर देना होगा।”

योगी आदित्यनाथ जी से विशेष संबंध

सुमन देवी के कार्यों से प्रभावित होकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से उनके आत्मीय और सौहार्दपूर्ण संबंध स्थापित हुए हैं।

कई बार उन्होंने जनता की समस्याओं को सीएम के समक्ष रखकर उनके निराकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

प्रशासनिक संस्थानों, थाना और पुलिस विभाग की विभिन्न समितियों में उन्हें बार-बार नामित किया जाना उनके कार्यों पर शासन-प्रशासन के भरोसे को दर्शाता है।

अटूट ऊर्जा, विनम्रता और सेवा का भाव

सुमन देवी का जीवन एक संदेश है कि साधारण परिवारों से निकलकर भी असाधारण कार्य किए जा सकते हैं।

उनके कार्यों में कहीं दिखावा नहीं, बल्कि सच्ची सेवा का भाव दिखाई देता है।

वे कहती हैं—

“मेरा जीवन समाज को समर्पित है। जब तक सांस है, सेवा का कार्य जारी रहेगा।”

अंततः

सुमन देवी की जीवनयात्रा समर्पण, नेतृत्व, साहस और नारी शक्ति का जीवंत उदाहरण है।

उनकी दूरदृष्टि, कर्मठता, निडरता और समाज के लिए लगातार कार्यरत रहने की क्षमता उन्हें प्रदेश की एक प्रमुख सामाजिक हस्ती बनाती है।

उनके प्रयासों से न केवल हजारों लोग प्रभावित हैं, बल्कि वे अनेक महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं।

सच में, सुमन देवी समाजसेवा की वह दीपशिखा हैं, जिनकी रोशनी आने वाली पीढ़ियों को राह दिखाती रहेगी।

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