करवल देवी मंदिर के पास ‘लाठियों का महायुद्ध’—थाने के बगल में ही बिगड़ी क़ानून-व्यवस्था!
रिपोर्टर – सुरेश राजभर


गोरखपुर के गगहा थाना क्षेत्र में बुधवार की शाम वह नज़ारा देखने को मिला जिसने लोगों को हिलाकर रख दिया। करवल देवी मंदिर परिसर, जहाँ भक्तों की भीड़ रहती है और माहौल हमेशा शांतिपूर्ण माना जाता है, वहीं दो दुकानदारों के बीच ऐसा बवाल मचा कि लाठियाँ बज उठीं, गालियाँ गूँजने लगीं और मंदिर के आँगन में खून तक बह गया। चौंकाने वाली बात यह है कि यह पूरा घटनाक्रम थाना परिसर से कुछ ही कदमों की दूरी पर हुआ—इसके बावजूद पुलिस समय रहते हालात न समझ सकी, न रोक सकी।
सूत्रों के अनुसार, मंदिर परिसर में चाट–पानीपुरी लगाने वाले गणेश गुप्ता और नारियल–चुनरी बेचने वाले सुरेश गुप्ता के बीच किसी पुरानी कहासुनी ने मंगलवार रात ही विवाद का बीज बो दिया था। स्थानीय लोगों का दावा है कि दोनों पक्षों ने “अगले दिन हिसाब बराबर करने” की तैयारी पहले से कर रखी थी। आरोप है कि बुधवार को जैसे ही मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़नी शुरू हुई, दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और देखते ही देखते माहौल लाठी-डंडों के शोर में बदल गया।
इस खूनी संघर्ष में गणेश गुप्ता पक्ष के 4–5 लोग बुरी तरह घायल हुए। एक युवक का सिर फट जाने के कारण उसे गगहा से जिला अस्पताल, गोरखपुर रेफर करना पड़ा। मंदिर परिसर में खून और टूटी लाठियों के निशान साफ बताते हैं कि यह सिर्फ झड़प नहीं, बल्कि योजनाबद्ध हमला था।
मंदिर की पवित्रता को अपमानित करने की साजिश?
स्थानीय भक्तों में इस बात को लेकर भारी नाराज़गी है कि मंदिर जैसे पवित्र स्थल को लड़ाई-झगड़े का अखाड़ा बना दिया गया। यह घटना केवल दो दुकानदारों का विवाद नहीं, बल्कि मंदिर की आस्था को कलंकित करने की कोशिश भी मानी जा रही है। श्रद्धालुओं का कहना है कि इस तरह की घटनाएँ सिर्फ मंदिर की गरिमा को ठेस नहीं पहुँचातीं बल्कि आवागमन करने वाले परिवारों और महिलाओं की सुरक्षा पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करती हैं।
पुलिस की नाकामी पर सवाल
घटना स्थल थाने से कुछ कदम की दूरी पर है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि अगर मारपीट की तैयारी एक दिन पहले से की जा रही थी तो खुफिया तंत्र को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? मंदिर परिसर में दुकानदारों के बीच तनाव की जानकारी होने के बावजूद पुलिस ने पहले से कोई रोकथाम क्यों नहीं की?
हालाँकि पुलिस मौके पर पहुँची और मामले को शांत कराया, घायलों को अस्पताल पहुँचवाया तथा चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया, लेकिन यह कार्रवाई घटना के बाद की मजबूरी लगती है।
गगहा पुलिस ने कहा है कि “मामले को गंभीरता से लेकर जाँच की जा रही है और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।” लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल एफआईआर से काम नहीं चलेगा—पुलिस को ऐसी घटनाओं के मास्टरमाइंड, तैयारी करने वालों और मंदिर परिसर को गंदा करने वाले गिरोहों पर भी शिकंजा कसना होगा।
समाज को क्या संदेश?—सख़्त कार्रवाई की माँग
यह घटना सिर्फ दो व्यक्तियों का विवाद नहीं, बल्कि यह बताती है कि यदि प्रशासन ढीला पड़े तो असामाजिक तत्व किसी भी पवित्र जगह को अपनी गुंडागर्दी के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। समाज को यह संदेश देना जरूरी है कि मंदिर, बाजार या सड़क कहीं भी कानून हाथ में लेने वालों को छोड़ा नहीं जाएगा।
पत्रकार समाज और स्थानीय नागरिकों की ओर से गगहा पुलिस से मांग है कि ऐसे तत्वों पर तुरंत और कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि करवल देवी मंदिर की गरिमा और श्रद्धालुओं की सुरक्षा दोबारा खतरे में न पड़े। मंदिर परिसर को झगड़े का मैदान बनाने वालों को उदाहरण स्वरूप दंडित किया जाना समय की मांग है।
—सुरेश राजभर