बंगाल के संत कवि भौवा पगला की भक्ति परंपरा को मिला सम्मान, अजंता सरकार को मिली वार्षिक रॉयल्टी

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बंगाल के संत कवि भौवा पगला की भक्ति परंपरा को मिला सम्मान, अजंता सरकार को मिली वार्षिक रॉयल्टी

कलम से — प्रबंध संपादक अजय उपाध्याय

पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा में संत कवि भौवा पगला का नाम श्रद्धा और भक्ति के साथ लिया जाता है। काली उपासना और भक्ति रस से ओत-प्रोत उनके गीत आज भी बंगाल के जन-जन में गूंजते हैं। यह गौरव का विषय है कि संत कवि भौवा पगला की अमूल्य भक्ति विरासत को आधुनिक समय में भी जीवंत बनाए रखने का कार्य निरंतर जारी है।

 

भौवा पगला के प्रसिद्ध भक्ति गीतों को सुप्रसिद्ध गायिका अजंता सरकार ने अपनी आवाज़ दी है। इन गीतों का एल्बम एक प्रतिष्ठित कंपनी “निरझरे सपनो” के माध्यम से तैयार किया गया है। कंपनी की नीति और सांस्कृतिक प्रतिबद्धता का परिचायक है कि इन गीतों की रॉयल्टी अजंता सरकार को हर वर्ष नियमित रूप से प्रदान की जाती है। वर्ष 2023, 2024 और 2025 में भी अजंता सरकार को उनके गीतों की रॉयल्टी प्रदान की गई, जिससे कलाकारों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा सुनिश्चित होती है।

 

इसी क्रम में हाल ही में अजंता सरकार को स्टूडियो में आमंत्रित किया गया, जहाँ रॉयल्टी से संबंधित औपचारिकता पूरी की गई। यह स्टूडियो बंगाल के संगीत जगत में प्रतिष्ठित नाम नीलय घोष के नेतृत्व में संचालित है, जिनका योगदान लोक संगीत और भक्ति परंपरा के संरक्षण में उल्लेखनीय रहा है। उनके प्रयासों से भौवा पगला के गीत न केवल बंगाल बल्कि देश-विदेश में भी सुने जा रहे हैं।

 

संत कवि भौवा पगला केवल एक कवि नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चेतना के प्रतीक रहे हैं। वे मां काली के अनन्य उपासक थे और उनकी भक्ति परंपरा आज भी जीवित है। दीघा क्षेत्र में स्थित मां हरबोला का मंदिर और वहीं स्थापित बाबा पगला की प्रतिमा, श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। यह स्थल न केवल धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक पहचान भी बन चुका है, जहाँ प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

 

यह भी उल्लेखनीय है कि संत कवि भौवा पगला द्वारा स्थापित मां काली की उपासना परंपरा को उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों में भी मान्यता और सम्मान मिला है। विभिन्न सरकारों, सांस्कृतिक संस्थानों और कलाकारों में इस बात को लेकर विशेष हर्ष है कि लोक-संतों और भक्ति संगीत को इस प्रकार प्रोत्साहन मिल रहा है।

 

अजंता सरकार ने भी इस सम्मान और प्रोत्साहन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह की पहल से कलाकारों को न केवल आर्थिक संबल मिलता है, बल्कि वे अपनी सांस्कृतिक विरासत को और अधिक निष्ठा से आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित होते हैं। कुल मिलाकर, यह पहल भारतीय लोक-संगीत, भक्ति परंपरा और कलाकार सम्मान की दिशा में एक प्रेरणादायी उदाहरण है।

कलम से अजय कुमार उपाध्याय

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