किसानों की आवाज़ को मजबूती देता आंदोलन : दिलीप किसान की रणनीति और महापंचायत का संकल्प

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वरिष्ठ संवाददाता अनुपमा दुबे की कलम से विशेष रिपोर्ट

 

किसानों की आवाज़ को मजबूती देता आंदोलन : दिलीप किसान की रणनीति और महापंचायत का संकल्प


कुशीनगर जनपद के पडरौना ब्लॉक अंतर्गत धनटोली ग्राम में भारतीय किसान यूनियन (लोक शक्ति) की एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता संगठन के पूर्वांचल प्रभारी माननीय पं. दिलीप किसान ने की। यह बैठक आगामी 19, 20, 21 एवं 22 जनवरी को प्रयागराज में आयोजित होने वाली किसान महापंचायत को सफल बनाने की रणनीति के तहत बुलाई गई थी, जिसमें क्षेत्र के किसानों, मजदूरों और महिला प्रकोष्ठ की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।

बैठक का नेतृत्व कुशीनगर जिला उपाध्यक्ष (महिला प्रकोष्ठ) कलावती निषाद ने किया, जबकि कुशीनगर उपाध्यक्ष मोनू कश्यप ने जनपद से अधिक से अधिक किसानों को प्रयागराज महापंचायत में शामिल होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह महापंचायत किसानों की वर्षों से लंबित समस्याओं को सरकार के समक्ष मजबूती से रखने का एक निर्णायक अवसर है।

बैठक के दौरान माननीय पं. दिलीप किसान ने किसानों और मजदूरों की समस्याएं गंभीरता से सुनीं। ग्रामीणों ने आवास, पेंशन, खाद-बीज की किल्लत, सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार और पात्रता के बावजूद लाभ न मिलने जैसी ज्वलंत समस्याएं उठाईं। इन मुद्दों पर दिलीप किसान ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “अब सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस रणनीति के साथ संघर्ष होगा और किसानों को उनका हक दिलाकर ही दम लेंगे।”

किसान आंदोलन में दिलीप किसान की भूमिका

पूर्वांचल में किसान आंदोलन को संगठित करने में दिलीप किसान की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वे केवल एक नेता नहीं, बल्कि किसानों के बीच से निकले हुए संघर्षशील प्रतिनिधि के रूप में पहचाने जाते हैं। उनकी खासियत यह है कि वे समस्याओं को सिर्फ मंच से नहीं उठाते, बल्कि गांव-गांव जाकर किसानों से संवाद करते हैं और आंदोलन को जमीन से जोड़ते हैं। यही कारण है कि किसानों में उनके प्रति गहरी आस्था और विश्वास है।

अनुपमा दुबे से विशेष वार्तालाप

बैठक के उपरांत वरिष्ठ संवाददाता अनुपमा दुबे से हुई बातचीत में पं. दिलीप किसान ने कहा—
“जनवरी में होने वाली प्रयागराज महापंचायत केवल एक सभा नहीं, बल्कि किसानों के भविष्य की लड़ाई है। अगर सरकार हमारी मांगों पर गंभीर नहीं हुई, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। हम शांतिपूर्ण लेकिन निर्णायक संघर्ष के लिए तैयार हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि किसान और मजदूर इस देश की रीढ़ हैं, लेकिन आज वही वर्ग सबसे अधिक उपेक्षित है। “हमारी लड़ाई किसी राजनीतिक दल से नहीं, बल्कि उस व्यवस्था से है जो किसानों की आवाज़ को दबाने का काम कर रही है,” उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा।

महिलाओं की मजबूत भागीदारी

बैठक में दुलारी देवी, रीना, रंभा देवी, कुसुम, रंजू देवी, नीतू देवी, सुमन देवी, सुनैना देवी, मंजू देवी, बिंद्रावती देवी सहित बड़ी संख्या में महिलाओं की उपस्थिति यह दर्शाती है कि किसान आंदोलन अब केवल पुरुषों तक सीमित नहीं, बल्कि महिलाएं भी नेतृत्वकारी भूमिका में सामने आ रही हैं।

सरकार के लिए स्पष्ट संदेश

धनटोली की यह बैठक साफ संकेत देती है कि यदि सरकार ने समय रहते किसानों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया, तो जनवरी की महापंचायत एक बड़े जनांदोलन का रूप ले सकती है। अब देखना यह है कि “डबल इंजन सरकार” किसानों की इस एकजुट आवाज़ को कितनी गंभीरता से सुनती है।

— अनुपमा दुबे
वरिष्ठ संवाददाता

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