संगठनात्मक दक्षता का सम्मान, निर्भीक पत्रकारिता की पहचान बने सुधाकर तिवारी

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संगठनात्मक दक्षता का सम्मान, निर्भीक पत्रकारिता की पहचान बने सुधाकर तिवारी

— अनुपमा दुबे (वरिष्ठ संवाददाता एवं पदाधिकारी), पूर्वांचल पत्रकार एसोसिएशन

सहजनवा (गोरखपुर)।

पूर्वांचल पत्रकार एसोसिएशन के लिए वर्ष 2025 संगठनात्मक मजबूती और पत्रकारिता के मूल्यों के संरक्षण का वर्ष बनकर उभरा है। इसी क्रम में संगठन के राष्ट्रीय महासचिव सुधाकर तिवारी को “संगठनात्मक दक्षता सम्मान” से सम्मानित किया जाना पूरे पत्रकार समाज के लिए गर्व का विषय है। यह सम्मान उन्हें संगठन विस्तार, निष्पक्षता, निर्भीकता और पत्रकार हितों के लिए सतत संघर्ष के लिए प्रदान किया गया।

रविवार को सहजनवा में आयोजित पूर्वांचल पत्रकार एसोसिएशन की मंडल स्तरीय बैठक में यह सम्मान समारोह सादगी, गरिमा और भावनात्मक वातावरण के बीच संपन्न हुआ। मंच से जब सुधाकर तिवारी का नाम लिया गया, तो तालियों की गूंज ने यह स्पष्ट कर दिया कि यह सम्मान किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि उस विचारधारा का सम्मान है, जो पत्रकारिता को मिशन मानती है।

म्मान के अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार संत प्रसाद धर द्विवेदी, संजय मिश्रा, कृपाशंकर सिंह, राष्ट्रीय संरक्षक संत कुमार सिंह, कृपाशंकर राय, साधू यादव, जयराम यादव, अनुपमा दुबे, संजय जायसवाल, राहुल हरेंद्र सिंह, प्रहलाद मौर्य, अमरनाथ यादव, डॉ. अरुण मिश्रा, डॉ. प्रमोद श्रीवास्तव, राजेश सिंह, कृष्ण कुमार तिवारी, ज्वाला तिवारी, चंदमौल पाण्डेय एवं राधामोहन सिंह सहित अनेक पत्रकारों और समाजसेवियों ने उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दीं।

इस अवसर पर वरिष्ठ संवाददाता एवं संगठन पदाधिकारी अनुपमा दुबे के साथ हुई एक विशेष पत्रकारिता वार्ता में सुधाकर तिवारी ने संगठन और पत्रकारिता को लेकर अपने विचार साझा किए। वार्ता के दौरान अनुपमा दुबे ने उनसे प्रश्न किया—

“आज के दौर में जब पत्रकारिता पर दबाव बढ़ रहा है, संगठन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी क्या है?”

इस पर सुधाकर तिवारी ने भावुक होते हुए कहा,

“संगठन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है अपने हर पत्रकार को अकेला न महसूस होने देना। जब तक संगठन अपने साथी के साथ चट्टान की तरह खड़ा नहीं होगा, तब तक निर्भीक पत्रकारिता केवल शब्द बनकर रह जाएगी।”

एक अन्य प्रश्न में पूछा गया—

“आपके लिए संगठन विस्तार का अर्थ क्या है?”

उन्होंने उत्तर दिया,

“संगठन विस्तार केवल सदस्य संख्या बढ़ाना नहीं है, बल्कि हर जिले, तहसील और गांव तक पत्रकारों को सम्मान, सुरक्षा और आत्मविश्वास देना है। हमारा संगठन तभी मजबूत होगा, जब आखिरी पंक्ति में खड़ा पत्रकार भी खुद को सुरक्षित महसूस करेगा।”

वार्ता के दौरान उनकी आंखों में संगठन के प्रति समर्पण और शब्दों में अनुभव की गहराई साफ दिखाई दे रही थी। उन्होंने यह भी कहा कि पत्रकारिता सत्ता के करीब जाने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की आवाज़ बनने का दायित्व है। यही सोच उन्हें अन्य लोगों से अलग बनाती है।

पूर्वांचल पत्रकार एसोसिएशन का यह सम्मान इस बात का प्रमाण है कि संगठन केवल कार्यक्रमों तक सीमित नहीं, बल्कि अपने कर्मठ पदाधिकारियों और पत्रकारों के कार्यों को पहचानने और सम्मान देने की परंपरा को सशक्त रूप से निभा रहा है।

अंततः कहा जा सकता है कि राष्ट्रीय महासचिव सुधाकर तिवारी का यह सम्मान उन सभी पत्रकारों के लिए प्रेरणा है, जो विषम परिस्थितियों में भी सत्य, साहस और संवेदना के साथ कलम चलाते हैं। यह सम्मान केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि निर्भीक पत्रकारिता के उज्ज्वल भविष्य का प्रतीक है।

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