अब तो इस राह से वो शख्स गुजरता भी नहीं*!! *अब किस उम्मीद पे दरवाजे से झांके कोई*!!

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  • *सम्पादकीय*
  • ✍🏾जगदीश सिंह सम्पादक✍🏾
  • *अब तो इस राह से वो शख्स गुजरता भी नहीं*!!
  • *अब किस उम्मीद पे दरवाजे से झांके कोई*!!
  • जीवन की बागवानी में वक्त के साथ प्राकृतिक परिवर्तन होता ही रहता लेकिन कुछ सुगन्धित पुष्प दिल में जो सुगन्ध भर देते हैं वह जिंदगी के आखरी लम्हे तक कसक पैदा करते रहते हैं।समय बदल जाता है लोग बदल जाते हैं लेकिन एहसास वहीं स्थिर रहता है।मन के आंगन मे नाचते मयूर के तरह जो छबि अंकित हो जाती उसको मिटाना आसान नही! भूलना मुश्किल हो जाता है निस्स्वार्थ प्रेम की तस्वीर में जब चाहत का रंग सलीके से भर जाता है तो वह दिल में उतर जाता है उसके आगे हर रंग फीका लगता है। बदलाव की बहती बयार में दीदार भले ही न हो मगर जिनके सानिध्य मे मुस्कराते खिल खिलाती जिंदगी पनाह पाती रही वक्त का आशियाना जगमगाता रहा दिल की दहलीज पर पहुंच कर जिनकी आशिक़ी आहें भरती रही वह लम्हा तन्हा होने पर बहुत याद आता है! वह पल निश्चित रूप से अमरत्व प्राप्त कर लिया होता है।जरा सोचिए अभिनव अकाट्य अ प्रदर्शित, मर्यादित तरंगित आवरण में जिनको दिल ने वरण किया क्या उस शख्सियत को भूलना आसान होगा !दिल की गहराईयों से निकलती पाबन्दियों के परिवेश से छलक कर निकली इबारत सच को बयां कर ही देती है। कभी-कभी किसी से इतना गहरा लगाव हो जाता है,कि वो सिर्फ इंसान नहीं रहता एहसास बन जाता है।ऐसा एहसास,जो सांसों की तरह होता है दिखता नहीं,पर उसके बिना सब कुछ अधूरा लगता है!बस एक दिन उससे बात न हो, तो लगता है जैसे दिन अधूरा है!फोन की स्क्रीन बार-बार जलती है!हर नोटिफिकेशन पर दिल धड़कता है! शायद उसी का मैसेज हो?-पर जब नहीं होता, तो वो धड़कन भी खामोशी में बदल जाती है।
  • कभी लगता है खुद से कह दूं क्या हुआ, एक दिन ही तो बात नहीं हुई।”
  • पर दिल मानता कहाँ है!वो कहता है
  • एक दिन नहीं, पूरी उम्र सूनी लग रही है बिना उसके।उसकी हंसी याद आती है,!वो छोटे-छोटे नखरे, वो ‘पता नहीं’! बोलकर छेड़ना,!वो हर बात में छिपा है!वो जब कहती थी “तुम पागल हो ना,”और मैं जवाब देता था, तेरे लिए ही तो! और फिर एहसास होता है
  • प्यार का मतलब हमेशा साथ होना नहीं!,कभी-कभी बस उसका न होना ही ये जताने को काफी होता है
  • कि वो तुम्हारे भीतर कितना गहराई तक उतर चुका है।शायद यही मोहब्बत है!
  • जब एक दिन की खामोशी, हज़ार बातों से ज़्यादा बोल जाती है!…
  • और उस खामोशी में भी बस एक ही आवाज़ आती है कब बात होगी फिर?”सोच के समन्दर में जज़्बात की उठती लहरों के बीच
  • मोहब्बत की सफ़ीना कब साहिल पर लंगर डाल देती पता ही नहीं चलता!बस यादों का कारवां रह रह कर झंझावाती हवाओं के बीच अश्कों की वर्षांत मे चेहरे को भी‌गोता रहता है! गुजरा हुआ ज़माना आता नहीं दुबारा? हाफिज खुदा तुम्हारा——–!!
    • सबका मालिक एक ऊं साई राम🌹🌹🕉️🙏🏾🙏🏾

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