रामपुर गडरी में लघु उद्योग से महिलाओं को मिला रोजगार, टिकोरी प्रजापति की पहल बनी मिसाल


सुरेश राजभर की कलम से
रामपुर गडरी क्षेत्र में लघु उद्योगों की ताकत और संभावनाओं को साकार करती एक प्रेरक कहानी सामने आई है। टिकोरी प्रजापति द्वारा संचालित लघु उद्योग आज न सिर्फ उत्पादन का केंद्र बन चुका है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक जीवन का मजबूत आधार भी बन रहा है। यह पहल इस बात का प्रमाण है कि यदि संकल्प मजबूत हो तो लघु उद्योग का एक छोटा सा सपना भी बड़े बदलाव की नींव बन सकता है।
इस लघु उद्योग के माध्यम से क्षेत्र की लगभग 35 से 40 महिलाओं को नियमित रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। पहले जहां ये महिलाएं घरेलू सीमाओं में सिमटी रहती थीं, वहीं आज वे अपने श्रम और कौशल के बल पर परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही हैं। नियमित आय मिलने से बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और घरेलू जरूरतों को पूरा करने में भी उन्हें आत्मविश्वास मिला है।
टिकोरी प्रजापति का कहना है कि उनका लक्ष्य केवल मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि स्थानीय महिलाओं को स्वावलंबी बनाकर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। उन्होंने बताया कि जो व्यापारी अब तक दिल्ली जैसे बड़े शहरों से माल मंगाते थे, यदि वे ब्लॉक रामपुर गडरी से ही उत्पाद खरीदें, तो उन्हें उसी दर पर गुणवत्तापूर्ण माल उपलब्ध कराया जाएगा। इससे स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्र से पूंजी का बाहर जाना भी रुकेगा।
स्थानीय स्तर पर उत्पादन और उचित मूल्य पर बिक्री की यह सोच न केवल रोजगार सृजन का माध्यम बनी है, बल्कि क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रही है। महिलाएं आज खुद को केवल कामगार नहीं, बल्कि इस विकास यात्रा की सहभागी मान रही हैं। उनके आत्मविश्वास में आई यह वृद्धि समाज के लिए सकारात्मक संदेश है।
रामपुर गडरी में टिकोरी प्रजापति की यह पहल यह साबित करती है कि बड़े उद्योगों के बिना भी गांवों में विकास संभव है। यदि इच्छाशक्ति, ईमानदारी और सामाजिक सरोकार साथ हों, तो लघु उद्योग का एक छोटा सा सपना भी बड़े भविष्य का निर्माण कर सकता है। यह मॉडल निश्चित रूप से अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा बनने की क्षमता रखता है।