फर्जी व कूटरचित दस्तावेजों से दो पासपोर्ट बनवाने का आरोप, सीएम पोर्टल पर शिकायत

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फर्जी व कूटरचित दस्तावेजों से दो पासपोर्ट बनवाने का आरोप, सीएम पोर्टल पर शिकायत

आईजीआरएस शिकायत पर पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल, गलत रिपोर्ट लगाकर किया गया मामला समाप्त

 

जनपद गोरखपुर के गगहा थाना क्षेत्र से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें फर्जी एवं कूटरचित दस्तावेजों के सहारे दो अलग-अलग पासपोर्ट बनवाने का आरोप लगाया गया है। यह आरोप ग्राम परेशापार निवासी रवि सिंह पर लगा है। मामले को लेकर ग्राम पंचायत पकड़ी दूबे के महुजा गांव निवासी विनोद सिंह ने मुख्यमंत्री पोर्टल (सीएम पोर्टल) पर शिकायत दर्ज कराई है, साथ ही उच्चाधिकारियों को लिखित शिकायत पत्र भी भेजा है।

शिकायतकर्ता विनोद सिंह के अनुसार, आरोपी रवि सिंह ने नाम और जन्मतिथि बदलकर दो अलग-अलग पासपोर्ट बनवाए हैं। आरोप है कि यह पूरी प्रक्रिया फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से की गई, जो न सिर्फ कानून का उल्लंघन है बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी गंभीर मामला है।

शिकायत में बताया गया है कि

पहला पासपोर्ट संख्या P-1287133 रवि कुमार के नाम से बनवाया गया, जिसमें जन्मतिथि 01 जनवरी 1997 दर्ज है।

दूसरा पासपोर्ट संख्या N-6411932 रवि प्रताप सिंह के नाम से बनवाया गया, जिसमें जन्मतिथि 15 नवंबर 1999 दर्ज की गई है।

दोनों पासपोर्ट में न केवल नाम बल्कि जन्मतिथि भी अलग-अलग दर्शाई गई है। आरोप है कि इस तरह पहचान बदलकर आरोपी ने नियमों को ताक पर रखते हुए पासपोर्ट हासिल कर लिया।

विनोद सिंह का कहना है कि इससे पूर्व भी इस प्रकरण को लेकर आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत की गई थी, लेकिन जांच अधिकारी द्वारा गलत और भ्रामक रिपोर्ट लगाकर मामले को समाप्त कर दिया गया। इससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय पुलिस को कई बार शिकायत देने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

शिकायतकर्ता ने यह भी आशंका जताई है कि आरोपी इन फर्जी पासपोर्टों का उपयोग विदेश यात्रा एवं देश विरोधी गतिविधियों के लिए कर सकता है। इसी गंभीरता को देखते हुए उन्होंने मामले में धोखाधड़ी, जालसाजी और पासपोर्ट अधिनियम की धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। इसके लिए उन्होंने एसएसपी गोरखपुर और एडीजी को भी पत्र भेजा है।

इस संबंध में एसपी साउथ दिनेश कुमार पूरी ने बताया कि पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि धोखाधड़ी कर दो पासपोर्ट बनवाना गैरकानूनी है और यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल, मामला जांच के दायरे में है, लेकिन आईजीआरएस शिकायत के बावजूद पहले की गई कथित लापरवाही ने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह है कि जांच के बाद दोषियों पर कब और क्या कार्रवाई होती है।

सुरेश राजभर

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