एक आवाज़ से टूटी वर्षों पुरानी समस्या की जंजीर

मझगवां बाजार में दिलीप किसान की पहल बनी जनआंदोलन की मिसाल
— वरिष्ठ संवाददाता अनुपम दुबे
गगहा क्षेत्र पंचायत अंतर्गत एक छोटे से कस्बे मझगवां बाजार ग्राम पंचायत, गगहा थाना के ठीक सामने और राधिका महाविद्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार पर वर्षों से बहता बजबजाता नाला क्षेत्रवासियों के लिए केवल दुर्गंध ही नहीं, बल्कि बीमारी और नारकीय जीवन का कारण बना हुआ था।
यह समस्या किसी एक दिन की नहीं, बल्कि वर्षों से “ग्रहण” की तरह इस क्षेत्र पर छाई हुई थी।
स्थानीय नागरिकों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक ने इस समस्या को लेकर कई बार पत्राचार किया, गुहार लगाई, लेकिन पीडब्ल्यूडी विभाग और संबंधित अधिकारियों के कानों तक आवाज़ कभी पहुँची ही नहीं। हालात ऐसे हो गए थे कि लोगों ने इसे अपनी नियति मान लिया था.
जब एक किसान ने भरी हुंकार
इसी निराशा के अंधेरे में एक नाम उभरा—दिलीप किसान।
एक छोटे, गरीब ब्राह्मण किसान परिवार में जन्मा यह व्यक्ति, जिसने स्वयं को किसी राजनीतिक पद या शक्ति से नहीं, बल्कि जनसेवा और आंदोलन की चेतना से जोड़ा।
दिलीप किसान ने इस ज्वलंत समस्या को लेकर गांधीवादी तरीके से आंदोलन की एक छोटी-सी हुंकार भरी, और यही हुंकार पूरे जिले के प्रशासनिक तंत्र को झकझोरने के लिए काफी साबित हुई।
स्थिति इतनी तेजी से बदली कि रातों-रात निर्णय लिया गया—या तो इस मार्ग का निर्माण होगा, या वर्षों पुरानी यह समस्या समाप्त की जाएगी।
व्यवधान भी आए, लेकिन हौसले नहीं डिगे
इस जनहित के कार्य में कुछ शरारती तत्वों ने व्यवधान उत्पन्न करने का भी प्रयास किया, लेकिन मां करवर देवी के पुजारी जैसे संकल्पित दिलीप किसान के सामने सारे भूत-बेताल किनारे हो गए।
नतीजा यह रहा कि जो समस्या वर्षों से लोगों की जिंदगी को दूभर किए हुए थी, वह कुछ ही दिनों—बल्कि कुछ घंटों में—समाप्त कर दी गई।
जनता का सम्मान, संघर्ष की जीत
समस्या के समाधान के बाद क्षेत्रवासियों में खुशी की लहर दौड़ गई। लोगों ने दिलीप किसान का माल्यार्पण कर, खुले दिल से सम्मान किया और उनके प्रयासों को ऐतिहासिक बताया।
“मैं राजनीति नहीं, समाज सेवा करता हूँ”
वरिष्ठ संवाददाता अनुपम दुबे से बातचीत में दिलीप किसान ने स्पष्ट शब्दों में कहा—
> “जनता की समस्या को दूर करना ही मेरा मुख्य उद्देश्य है।
मैं कोई राजनीतिक व्यक्ति नहीं हूँ और न ही राजनीति करना चाहता हूँ।
मैं एक किसान हूँ और किसानों व आम जनता की समस्याओं को उठाना और उनका समाधान कराना ही मेरा धर्म है।”
उन्होंने आगे कहा—
> “जब भी मेरे इलाके में कोई समस्या आएगी और जब कोई सुनने वाला नहीं होगा,
तो मैं गांधीवादी तरीके से आंदोलन का रास्ता चुनूँगा।
मुझे न किसी पद की लालसा है, न किसी कद की।
मैं एक ब्राह्मण हूँ और ब्राह्मण धर्म का पालन करते हुए समाज कल्याण के लिए सदैव तत्पर रहूँगा।”
अधिकारियों ने किया स्थल निरीक्षण
समस्या समाधान के बाद पीडब्ल्यूडी विभाग के एईई अभिराज सिंह ने राधिका महाविद्यालय के सामने निर्माणाधीन मार्ग का निरीक्षण किया।
इस अवसर पर भारतीय किसान यूनियन लोक शक्ति के पूर्वांचल प्रभारी दिलीप किसान, रविंद्र राय सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता का परीक्षण किया और संतोष व्यक्त किया।
स्थल पर मौजूद लोगों के चेहरों पर संतुष्टि, राहत और आत्मीयता का भाव साफ दिखाई दे रहा था।
एक मिसाल, जो याद रखी जाएगी
मझगवां बाजार की यह घटना केवल एक सड़क या नाले के निर्माण की कहानी नहीं, बल्कि यह बताती है कि
जब एक साधारण किसान, निस्वार्थ भाव से जनता के लिए खड़ा होता है—तो व्यवस्था को झुकना ही पड़ता है।
यह संघर्ष, यह जीत और यह पहल आने वाले समय में जनआंदोलन की मिसाल के रूप में याद की जाएगी।

उप संपादक अनुपमा दुबे